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Saturday, March 7, 2026

कौशल विकास से ही विकसित भारत का मार्ग होगा प्रशस्तप्रदेश में अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे – डॉ. बैरवाभारतीय स्किल डेवलपमेंट यूनिवर्सिटी में दूसरा दीक्षांत समारोह संपन्न

भारतीय स्किल डेवलपमेंट यूनिवर्सिटी भारत का पहला विश्वविद्यालय है जो विशेष रूप से कौशल-आधारित कार्यक्रमों के लिए समर्पित है, जो छात्रों को वैश्विक परिदृश्य में आगे बढ़ने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए विविध श्रेणी के पाठ्यक्रम प्रदान करता है यहाँ छात्र अपनी प्रतिभाओ या अपनी रूचि के माध्यम से अपनी शिक्षा को एक नया आयाम देते है आज भारतीय स्किल डेवलपमेंट यूनिवर्सिटी-बीएसडीयू के दूसरे दीक्षांत समारोह आयोजन हुआ जिसमें सैकड़ों छात्र-छात्राओं को उनकी मेहनत और कौशल के लिए सम्मानित किया गया।जिसमे अतिथि के रूप में राजस्थान सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री व उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा मौजूद रहे आइए आपको दिखाते है इस कार्यक्रम की झलकियां और रूबरू करवाते है बीएसडीयू विश्वविद्यालय के कुछ मुख्य पहलुओ से कौशल विकास से ही विकसित भारत का मार्ग प्रशस्त होगा और अपार युवा संसाधन की प्रतिभा के साथ न्याय भी हो सकेगा। स्किल एजुकेशन और स्किल डेवलपमेंट से न केवल रोजगार के नए अवसरों का सृजन होगा, बल्कि भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में भी कारगर कदम उठाये जा सकेंगे। ये कहना है राजस्थान सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री व उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा का। वे आज भारतीय स्किल डेवलपमेंट यूनिवर्सिटी-बीएसडीयू के दूसरे दीक्षांत समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।

कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नए भारत की संकल्पना को साकार करने में स्किल एजुकेशन की बड़ी भूमिका है जिस पर प्रदेश की सरकार भी पूरा फोकस कर रही है। श्री बैरवा ने कहा कि स्किल एजुकेशन में बीएसडीयू जैसा विश्व स्तरीय परिसर प्रदेश के लिए गौरव की बात है। डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने आगे कहा कि राइजिंग राजस्थान समिट में 35 लाख करोड़ के एमओयू के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा की जा रही है जिसमें अक्षय ऊर्जा में भी बड़ा निवेश किया गया है और आने वाले समय में प्रदेश में इस क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

बीएसडीयू के प्रेसिडेंट प्रोफेसर विवेक भंडारी ने बताया कि विश्वविद्यालय को एनआईआरएफ में तीसरी रैंक मिली है। यह राजस्थान का कौशल आधारित विश्वविद्यालय है। यहां ऑटोमोटिव स्किल्स, अक्षय ऊर्जा, कंप्यूटिंग, मैन्युफैक्चरिंग समेत कई प्रोफेशनल कोर्स चलाए जाते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय की अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, उद्योग साझेदारी और व्यावहारिक प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इससे स्किल्स एजुकेशन में नए मानक स्थापित हुए हैं।

आपको बतादे की दीक्षांत समारोह में राजेंद्र एंड उर्सुला जोशी गोल्ड मैडल और आरयूजेसीटी गोल्ड मैडल के साथ करीब 300 डिग्रियां प्रदान की ग। जिसमें 278 बी.वॉक, 7 एम.वॉक और 16 पीएच.डी. शामिल हैं। कार्यक्रम में बोर्ड ऑफ़ मैनेजमेंट, एकेडमिक कॉउन्सिल सदस्यों के साथ बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स उपस्थित थे. रजिस्ट्रार डॉ. शेख जुनैद ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

डिग्रियां हासिल करने के बाद विश्वविद्यालय के छात्रों में एक नई उमंग और ख़ुशी देखने को मिली इस अवसर पर विश्वविद्यालय में कार्यरत रामविलास अग्रवाल, जो पंजाब नेशनल बैंक से रिटायर्ड बैंकर हैं, डॉ. रामबिलास अग्रवाल ने मीडिया से बातचीत की और अपने जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया की रिटायरमेंट के बाद मैंने भारतीय स्किल डवलपमेंट यूनिवर्सिटी टीचिंग के लिए जॉइन की। लेकिन यहां बच्चों को देखने के बाद दोबारा अपने को अपडेट करने की प्रेरणा मिली। मैंने पीएचडी के लिए प्रवेश किया। यूनिवर्सिटी ने मुझे बच्चों को पढ़ाते हुए पीएचडी करने का मौका दिया उन्होंने यह भी कहा की इस उम्र में आदमी खत्म हो जाता है, पढ़ने की बात तो सोच ही नहीं सकता। लेकिन यहां के साथियों की प्रेरणा थी कि मैंने पीएचडी में प्रवेश किया। ज्वॉइन करने के बाद भी सब लोग पूछते थे कि क्या आप पीएचडी कम्पलीट कर पाओगे। लेकिन जुनून के साथ मैंने मैनेजमेंट में अपनी पीएचडी पूरी की। इस उम्र में पीएचडी पूरी करना मेरे लिए एक नया अध्याय है, और मैं चाहता हूँ कि युवा पीढ़ी भी निरंतर सीखने के महत्व को समझे।”

रामविलास के इस जज्बे ने ये साबित कर दिया की पढ़ने की वाकई कोई उम्र नहीं होती और अगर व्यक्ति चाहे तो लोगो के लिए प्रेरणा बन सकता है और आगे बढ़ सकता है उनका यह जीवन का अनुभव सभी के लिए प्रेरणादायक है।”

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