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Saturday, March 7, 2026

चंद्रयान 3 में छोटी सी चूक से हो सकता था भारी नुकसान, टाइम कंपलेक्सिटी पर इसरो साइंटिस्टों ने किया बेहतरीन काम : डी.पी. शर्मा

नई दिल्ली : चांद की सतह पर विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग के बाद भारत विश्व भर मैं अपनी पहचान साबित करने में सफल रहा जिसका पूरा श्रेय भारतीय वैज्ञानिकों एवं अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की टीम को जाता है। 23 अगस्त की शाम 6:04 पर चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर सफलतापूर्वक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड हुआ इसके बाद विक्रम रोवर प्रज्ञान ने चंद्रमा की धरती पर भारत की छाप छोड़ते हुए अपना कार्य शुरू कर दिया है इसके बाद दुनिया भर में भारत देश ने अपना परचम लहराया है। चंद्रयान-3 से पहले चंद्रयान 2 को चंद्रमा की ऑर्बिट में भेजा गया था लेकिन सफल लैंडिंग नहीं होने के कारण चंद्रयान 2 मिशन अधूरा रह गया। इसकी असफलता से सबक लेते हुए इसरो वैज्ञानिकों में अपने अथक प्रयासों और लगातार शोध कार्यों के बाद इस सफलता को हासिल किया है जो वाकई तारीफ के काबिल है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय कंप्यूटर वैज्ञानिक डॉक्टर डीपी शर्मा ने इसरो साइंटिस्टों का धन्यवाद करते हुए कहा कि आज पूरा विश्व भारत देश हमारे भारतीय वैज्ञानिकों की अद्भुत क्षमता को देखकर चकित है।
हालांकि चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करना आसान नहीं था लेकिन इसरो के वैज्ञानिकों एवं उनकी टीम ने कड़ी मेहनत कर भारत को विश्व के विकसित राष्ट्रों के बीच चौथी श्रेणी पर लाकर खड़ा कर दिया है। डीपी शर्मा ने बताया कि चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग के लिए माइक्रोसेकंड की जानकारी बहुत महत्वपूर्ण साबित हुई जिसकी टाइम कंपलेक्सिटी को कंट्रोल करने वाला कंप्यूटिंग एल्गोरिथम हमारे वैज्ञानिकों ने इस तरह से डिजाइन किया कि पॉइंट 0 .001% वेरिएशन की गुंजाइश न रहे। यदि इस दौरान यह वेरिएशन होता तो शायद हमारा मिशन चंद्रयान 3 फेल हो सकता था।
भारत की इस बड़ी उपलब्धि के लिए डॉ. डी.पी. शर्मा ने इसरो के अध्यक्ष डॉ सोमनाथ वह वैज्ञानिक टीम के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया।

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