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Tuesday, March 10, 2026

नए संसद भवन में पहले बिल के रूप में महिला आरक्षण विधेयक पेश होने की अटकलें

दिव्य गौड़।

पूरे देश में नए संसद भवन में प्रवेश के साथ साथ देश की जनता इस बात को लेकर भी ज्यादा चर्चा कर रही है कि नए संसद भवन में सबसे पहले बिल कौन सा पारित हो सकता है। नए संसद भवन में बुधवार 20 सितंबर को पहले बिल के रूप में महिला आरक्षण विधेयक पेश होने की अटकलें लगाई जा रही है।

हमारे भाजपा के सूत्रों के मुताबिक मंगलवार 19 सितंबर को नए भवन में संसद के विशेष सत्र की शुरुआत गैर सरकारी कामकाज निर्धारित किया गया है,इसलिए 18 और 19 सितंबर को संसद में कोई सरकारी बिल पेश नहीं होगा लेकिन बुधवार 20 सितंबर को नवनिर्मित संसद भवन में संसद के विशेष सत्र में मोदी सरकार पिछले 27 साल से लंबित चल रहे महिला आरक्षण विधेयक को प्रस्तुत करने की संभावनाएं जताई जा रही है। ऐसा माना जा रहा है कि महिला आरक्षण विधेयक को लेकर मोदी सरकार ने पूरी तैयारी कर रखी है और संसद के विशेष सत्र के 20 से 22 सितंबर तक महिला आरक्षण विधेयक को लोकसभा राज्यसभा में पेश कर पारित करवाए जाने की पूरी कोशिश रहेगी।

सूत्रों की माने तो मोदी सरकार इन बिलों को पारित करवाने के लिए पहले ही एक्सरसाइज कर चुकी है। मोदी सरकार को महिला आरक्षण विधेयक के आसानी से पास होने की पूरी उम्मीद है। वह आश्वस्त भी है कि इस बिल को पारित करने में कोई रुकावट पैदा नहीं होगी।

मोदी सरकार के सहयोगी राजनीतिक दल महिला आरक्षण विधेयक का खुलकर समर्थन करने से देश की आधे से अधिक राज्यों में की विधानसभाओं में भी महिला आरक्षण विधेयक बिल पारित होने के असर है। जिससे कि वह पूरे देश में आसानी से लागू हो जाएगा।

पिछले दिनों राज्यसभा सचिवालय ने संसद के 18 से 22 सितंबर विशेष सत्र की कार्य सूची में दूसरे बिलों को उल्लेखित किया था वह चारों बिल भी बुधवार 20 सितंबर बाद संसद के विशेष सत्र में पेश कर दिए जाएंगे।

संसद में महिला आरक्षण विधायक पारित होने पर 3 महीने में ही होने वाले पांच राज्यों की विधानसभा चुनाव की राजनीति पर सीधा असर पड़ेगा। साथ ही पांचो राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव की रणनीति पर भी यह खास असर डालेगी। हर जिले में 2 से 3 विधानसभा सीट महिला उम्मीदवार के लिए सुरक्षित हो जाएगी। जिससे वहां के मौजूदा विधायक और दावेदारों का चुनावी गणित बिगड़ जाएगा। राजनीतिक दलों का चुनाव करने के साथ ही जातिगत समीकरणों के साथ साथ उम्मीदवार चयन की रणनीति पर भी इस बिल का सीधा असर पड़ेगा और इसे मोदी का एक मास्टर स्टॉक भी देखा और समझा जा रहा है।

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