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Sunday, March 8, 2026

पितृ पक्ष के दौरान इस तरह विधि विधान से करे पूजा,मिलेगा पितृ आशीर्वाद

29 सितम्बर 2023 शुक्रवार से महालय श्राद्ध आरम्भ हो रहे हैं। श्राद्ध पक्ष में अपनाए जाने वाले सभी मुख्य नियम को विधि विधान से करने पर पितृ प्रसन्न रहते हैं और आशीर्वाद देते हैं।ऐसा भी माना जाता जिसने कि इन 15 दिनों में ये पितृ लोक से पृथ्वी पर आते हैं और अपने अपने प्रियजनों के घर जाते हैं।श्राद्ध के दिन भगवदगीता के सातवें अध्याय का माहात्म पढ़कर फिर पूरे अध्याय का पाठ करना चाहिए एवं उसका फल मृतक आत्मा को अर्पण करना चाहिए।

पितृ पक्ष के 15 दिन पितरों को समर्पित होते हैं इस दौरान श्राद्ध कर्म, दान, गरीबों को खाना खिलाने से पितरों की आत्माएं प्रसन्न होती हैं पितृ पक्ष के दौरान पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध किया जाता है हिंदू पंचांग के अनुसार पितृ पक्ष भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि से प्रारंभ होकर आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की स्थापना तिथि को समाप्त होता है हिंदू धर्म में पितृपक्ष यानी श्राद्ध का विशेष महत्व है पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करके उसका कर्म हो किया जाता है पितृ पक्ष में पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है इस दौरान न केवल पितरों की मुक्ति के लिए उनका श्राद्ध किया जाता है, बल्कि उनके प्रति सम्मान भी व्यक्त किया जाता है तो आइए जानते हैं पितृ पक्ष की प्रमुख तिथियों और महत्व के बारे में….

              
पितृ पक्ष 2023 कब से शुरू हो रहे हैं?
इस वर्ष पितृ पक्ष 29 सितंबर 2023, शुक्रवार से प्रारंभ हो रहा है इस दिन पूर्णिमा श्राद्ध और प्रतिपदा श्राद्ध है पितृ पक्ष का समापन 14 अक्टूबर, शनिवार को होगा पंचांग के अनुसार, भाद्रपद पूर्णिमा 29 सितंबर को दोपहर 03:26 बजे तक है और उसके बाद आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी, जो 30 सितंबर को दोपहर 12:21 बजे तक है।

पितृ पक्ष में तिथि का महत्व
जब पितृ पक्ष प्रारंभ होता है तो प्रत्येक दिन की एक तिथि होती है तिथि के अनुसार ही श्राद्ध करने का नियम है उदाहरण के लिए, इस वर्ष द्वितीया श्राद्ध 30 सितंबर को है यानी पितृ पक्ष में श्राद्ध की द्वितीया तिथि है जिन लोगों के पूर्वजों की मृत्यु किसी भी महीने की द्वितीया तिथि को होती है, वे पितृ पक्ष के दूसरे दिन अपने पूर्वजों का श्राद्ध करते हैं इसी प्रकार पूर्वज की मृत्यु भी माह और पक्ष की नवमी तिथि को होगी वे पितृ पक्ष की नवमी श्राद्ध के लिए तर्पण, पिंडदान आदि की कामना करते हैं।

पितृ पक्ष 2023 श्राद्ध की मुख्य तिथियां
पूर्णिमा श्राद्ध- 29 सितंबर 2023
प्रतिपदा का श्राद्ध – 29 सितंबर 2023
द्वितीया श्राद्ध तिथि- 30 सितंबर 2023
तृतीया तिथि का श्राद्ध- 1 अक्टूबर 2023
चतुर्थी तिथि श्राद्ध- 2 अक्टूबर 2023
पंचमी तिथि श्राद्ध- 3 अक्टूबर 2023
षष्ठी तिथि का श्राद्ध- 4 अक्टूबर 2023
सप्तमी तिथि का श्राद्ध- 5 अक्टूबर 2023
अष्टमी तिथि का श्राद्ध- 6 अक्टूबर 2023
नवमी तिथि का श्राद्ध- 7 अक्टूबर 2023
दशमी तिथि का श्राद्ध- 8 अक्टूबर 2023
एकादशी तिथि का श्राद्ध- 9 अक्टूबर 2023
माघ तिथि का श्राद्ध- 10 अक्टूबर 2023
द्वादशी तिथि का श्राद्ध- 11 अक्टूबर 2023
त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध- 12 अक्टूबर 2023
चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध- 13 अक्टूबर 2023
सर्वपितृ मोक्ष श्राद्ध तिथि- 14 अक्टूबर 2023


पितृ पक्ष के दौरान करें ये उपाय
शास्त्रों में ज्ञात है कि पितृ पक्ष में स्नान, दान और तर्पण आदि का विशेष महत्व होता है इस दौरान श्राद्ध कर्म या पिंडदान आदि किसी जानकार व्यक्ति से ही कराना चाहिए साथ ही किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन, धन या वस्त्र का दान करें ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है पितृ पक्ष में पूर्वजों की मृत्यु की तिथि के अनुसार श्राद्ध कर्म या पिंडदान किया जाता है यदि किसी व्यक्ति को अपने पूर्वजों की मृत्यु की तिथि याद नहीं है तो वह आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या के दिन यह अनुष्ठान कर सकता है ऐसा करने से भी पूर्ण फल प्राप्त होता है।

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