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Tuesday, March 10, 2026

ज्ञानवापी में बरसों के इंतज़ार के बाद विधिविधान से पूजा हुई शुरू

कोर्ट के आदेश के बाद अब ज्ञानवापी में पूजा शुरू हो गई हैं। आज ज्ञानवापी की विधिविधान से पूजा शुरू हुई। ज्ञानवापी के दक्षिण में व्यासजी के तहखाने में मूर्तियों का दर्शन करने के लिए लोग पहुंचने लगे हैं। भक्ति से सराबोर होकर भक्त बैरिकेडिंग के बाहर से ही झांककर दर्शन कर रहे हैं। फ़िलहाल अभी आम लोगों को तहखाने के अंदर जाने की इजाजत नहीं दी गई है।

कई सालों के बाद ​​​​​​तहखाने में 31 साल के इंतज़ार के बाद कल यानी बुधवार को देर रात 11 बजे मूर्तियां रख कर पूजा-अर्चना की गई। दीप जलाकर गणेश-लक्ष्मी की आरती उतारी गई। तहखाने की दीवार पर बने त्रिशूल समेत अन्य धार्मिक चिह्नों को भी पूजा गया।

वाराणसी कोर्ट के आदेश का पालन करने में प्रशासन को सिर्फ 8 घंटे लगे। आदेश के बाद काशी विश्वनाथ धाम परिसर में पुलिस-प्रशासन की हलचल तेज हो गई। आधिकारियों ने रात 8 बजे ज्ञानवापी तहखाने की बाहर से ही जांच-पड़ताल की। रात 9 बजे काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शनार्थियों की भीड़ कम होने के बाद 4 नंबर गेट से प्रशासन ने लोगों का प्रवेश बंद करा दिया। करीब 9:30 बजे कड़ी सुरक्षा के बीच विश्वनाथ मंदिर के पूर्वी गेट से ट्रस्ट के कर्मचारियों को बुलाकर बैरिकेडिंग हटाने का काम शुरू किया। लगभग एक घंटे में रात 10.30 बजे तक बैरिकेडिंग को हटा दिया गया।

इसके बाद काशी विश्वनाथ ट्रस्ट के कर्मचारियों ने अंदर सफाई की। ट्रस्ट की ओर से तहखाने में पूजा की सामग्री लाई गई। ट्रस्ट के 5 पुजारी बुलाए। फिर रात 11 बजे पूजा-अर्चना की गई। पूजा के समय तहखाने में कमिश्नर बनारस, CEO विश्वनाथ मंदिर, ADM प्रोटोकॉल, गणेश्वर शास्त्री द्रविड और पंडित ओम प्रकाश मिश्रा मौजूद थे। गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ की अगुआई में विश्वनाथ मंदिर के पुजारी ओमप्रकाश मिश्रा ने पूजा की।

ओम प्रकाश मिश्रा काशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह के पुजारी हैं। मंगला आरती में मुख्य अर्चक की भूमिका यही निभाते हैं। पूजा के बाद कुछ लोगों को चरणामृत और प्रसाद भी दिया गया। आचार्य गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ ने कलश स्थापित किया। फिर मंत्रोच्चार कर गौरी गणेश और लक्ष्मी का आह्वान किया।

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