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Sunday, March 8, 2026

भाजपा विधायक कैलाश मेघवाल ने कानून राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल पर भ्रष्टाचार के आरोप, सीएम गहलोत ने जांच कराने की घोषणा से राजनीति में आया तूफान

जैसे जैसे विधानसभा चुनाव सामने आ रहे हैं जैसे वैसे भाजपा की एक दूसरे नेताओं के प्रति आंतरिक कलह और फुट अब खुलकर सामने आती दिखाई दे रही हैं। हालांकि पार्टी ने सभी को साथ लेकर चलने की नीति रीति पर काम करने का कितना ही दम भरा हो लेकिन हकीकत में ऐसा होता दिखाई नही दे रहा हैं।

ऐसा ही वाकया हुआ जिसमें भाजपा के शाहपुरा से वरिष्ठ विधायक और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने केंद्रीय कानून राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर राजस्थान की राजनीति में फिर से एक नया तूफान खड़ा कर दिया है। अब इस भाजपा के आपसी गुटों की बयानबाजी पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस पार्टी भी इस मुद्दे को भुनाने में कोई कमी नही चोदना चाहते हैं। बीजेपी विधायक कैलाश मेघवाल के बयान देते ही राजस्थान की राजनीति गर्म हो गई हैं । कैलाश मेघवाल के बयान के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कानून राज्यमंत्री मेघवाल चूरू कलक्टर के कार्यकाल की जांच कराने का फैसला किया है।

सीएम गहलोत ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि हाईकोर्ट से कार्रवाई पर स्टे ले रखा है। उन्होंने कहा कि इसकी जांच शुरू कर दी गई है और मामले में क्या कुछ हुआ,उसे उजागर किया जाएगा। भाजपा में अचानक हुए इस घटनाक्रम से हड़कंप है और इस बात की चर्चा जोरों पर होने लगी है कि आखिर यह सब क्यों हुआ ! वही अब इस बयान के बाद राजस्थान की राजनीति में सियासी रंग जमना तो तय ही था तो पार्टी ने भी बचाव और खानापूर्ति के लिए भाजपा की अनुशासन समिति ने कैलाश मेघवाल को नोटिस जारी कर 10 दिन में जवाब प्रस्तुत करने को कहा है।

वही विधायक कैलाश मेघवाल ने भी कहा है कि वह नोटिस मिला है वे जवाब देंगे। यह बात सही है कि विधायक कैलाश मेघवाल के पास दस्तावेज मौजूद है जिसमें चूरू के जिला कलक्टर रहते हुए अर्जुन राम मेघवाल द्वारा युद्ध विधवाओं के लिए भूमि के आवंटन में गड़बड़ी करने और अपने रिश्तेदारों को जमीन का आवंटन करने का आरोप लगा हुआ है। भ्रष्टाचार के इस मामले में वर्ष 2011 में हाकम अली ने एसीबी को शिकायत की थी। एसीबी ने तीन बार शिकायत की जांच भी कराई जुलाई 2014 में ट्रायल कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करने से मना कर दिया था। कोर्ट ने इस मामले की एसपी स्तर के अधिकारी से जांच कराने को कहा था लेकिन जांच नहीं की गई। हाई कोर्ट में कार्रवाई पर स्टे ले लिया गया है।

अर्जुन राम मेघवाल पर चूरू कलक्टर रहते हुए भ्रष्टाचार का दूसरा मामला जेठालाल खत्री ने 2007-2008 में रणधीसर पहाड़ी में खनन पट्टे आवंटन करने में मापदंडों का उल्लंघन करने का आरोप लगा है और एसीबी में शिकायत की गई लेकिन उसकी कोई जांच नहीं हुई।कानून राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा है कि वे मानहानि का दावा करेंगे। उन्होंने कहा कि कैलाश मेघवाल वर्ष 2023 में होने वाले विधानसभा का चुनाव लड़ना चाहते हैं। पार्टी ने अधिक उम्र वालों को टिकट नहीं देने की बात से कैलाश मेघवाल नाराज है। यही कारण है कि वे इस तरह से आरोप लगा रहे हैं। आप चाहे कुछ भी हो लेकिन प्रदेश की राजनीति में जिस प्रकार से अर्जुन राम मेघवाल पर आरोप लगाए हैं उससे उनकी भविष्य की राजनीति पर प्रश्नचिन्ह लगने की संभावना बन गई है।

अब चाहे जो कुछ हो लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले जो स्थितियां बनी है उससे किसको नुकसान होगा। फिलहाल कुछ कहना संभव नहीं है !

राजस्थान की राजनीति में नेताओं का आपसी ये पहला विवाद नही हैं जब एक दूसरे पर खुलकर कटाक्ष किया गया हो।इससे पहले भी ऐसा कई बार हुआ हैं। पहले केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत पर और अब अर्जुन राम मेघवाल भी विवादित बन गए है। जबकि भाजपा ने दलित वोट बैंक साधने के लिए अर्जुन राम मेघवाल को पहले कानून राज्यमंत्री बनाया और इसके बाद चुनाव गोष्ट कमेटी का संयोजक बनाकर यह संदेश देने का प्रयास किया कि भविष्य की राजनीति में उनका महत्व बना रहेगा। लेकिन अब पार्टी के ही बड़े उम्र और अनुभवशाली नेता की ओर से दिए गए एक बयान के बाद नए घटनाक्रम ने सब कुछ बदल दिया है।

आने वाले समय में क्या कुछ होगा इसके लिए इंतजार ही करना पड़ेगा। पार्टी ने जिस समीकरणों और रणनीति के साथ पहले जो फैसले लिए थे। क्या वो फैसले धरातल पर पार्टी को अपनी रणनीति में जीत दिला पायेंगे या फिर आंतरिक कलह दीमक का काम कर पार्टी को खोखला कर देंगी। इसका परिणाम आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में ही देखने को मिलेगा।

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