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Saturday, March 7, 2026

राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि के नाम जारी किया डाक टिकट

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में ब्रह्माकुमारीज़ की पूर्व मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि की 16 वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजली देते हुए उनके नाम डाक टिकट जारी किया। इस मौके पर केंद्रीय संचार राज्यमंत्री देवु सिंह चौहान और ब्रह्माकुमारीज़ के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।

समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि आज से 16 वर्ष पूर्व 25 अगस्त 2007 को दादी प्रकाशमणि जी का देहावसान हुआ था। आज उनके नाम पर डाक टिकट जारी करके हम उन्हें श्रद्धांजली दे रहे हैं। चंद्रयान-3 की सफलता ने भारत को विश्व में एक नए मुकाम पर पहुंचा दिया है। हमारे वैज्ञानिकों ने भारत का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। 

दादी प्रकाशमणिजी चार दशकों तक ब्रह्माकुमारीज़ की मुख्य प्रशासिका रहीं। उनके मार्गदर्शन में ही संस्था छोटे से रूप से विश्वस्तर पर पहुंची। ऐसी शक्तिशाली आत्मा ही दूसरों काे सशक्त बना सकती है। मनुष्य को उसकी आत्मिक शक्ति का अहसास कराना एक महान कार्य है। उनका नाम ही था प्रकाशमणि। प्रकाश का मतलब ही है जगाना। उन्होंने अध्यात्म का प्रकाश पूरे विश्व में फैलाया। दादी ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच भी लोगों को अध्यात्म का संदेश दिया और ब्रह्माकुमारी परिवार के साथ खड़ी रहीं। आज दादी भले शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके आध्यात्मिक संदेश और शिक्षाएं आने वाली पीढ़ियों को संदेश देते रहेंगे। आज उनकी पुण्य स्मृति पर डाक टिकट जारी करते हुए बेहद प्रसन्नता हो रही है।

खुद को हेड समझने से होती है हेडक-

केंद्रीय संचार राज्यमंत्री देवु सिंह चौहान ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ के संस्थापक ब्रह्मा बाबा ने शुरू से ही माताओं-बहनों को आगे रखा। दादी के बारे में बताना मतलब सूरज को दीया दिखाना है। आज बहुत गर्व महसूस हो रहा है कि नारी शक्ति की मिसाल राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि जी के पुण्य स्मृति दिवस पर डाक टिकट जारी किया जा रहा है। दादी चीफ होते हुए भी कहती थीं कि हेड नहीं समझना चाहिए। हेड समझने से हेडक होती है। दादी पूरे विश्व के ब्रह्माकुमारियों की नेता रहीं। डाक टिकट के माध्यम से डाक विभाग दादीजी के लिए एक छोटी सी श्रद्धांजलि दे रहा है।  

माउंट आबू को महान तीर्थ बनाया-

अतिरिक्त महासचिव बीके बृजमोहन भाई ने कहा कि 18 जनवरी 1969 को ब्रह्मा बाबा के शरीर छोड़ने के बाद दादीजी ने इस विश्व विद्यालय की बागडोर संभाली। उन्होंने सब आत्मा हैं इस कॉमन बात को लेकर सारे विश्व को एकसूत्र में बांधा। इसके परिणाम स्वरूप 140 देशों में सेवाकेंद्र खुले। दादीजी ने माउंट आबू को विश्व के लिए एक महान तीर्थ बना दिया।

ओआरसी की निदेशिका बीके आशा दीदी ने कहा कि महिला सशक्तिकरण और महिलाओं के उत्थान से ही स्वर्णिम दुनिया इस धरा पर आ सकती है। राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि ने अपने पुरुषार्थ से 40 हजार ब्रह्माकुमारी बहनों की रुहानी फौज तैयार की। ऐसी महान शख्सियत के पुण्य स्मृति दिवस पर आज डाक टिकट जारी किया जा रहा है जो बहुत ही हर्ष का विषय है। संस्थान की ओर से शॉल पहनाकर राष्ट्रपति का सम्मान किया गया। इस दौरान दादीजी के जीवनी पर बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म का भी प्रदर्शन किया गया

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