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Sunday, March 8, 2026

लोकसभा चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड योजना अवैधानिक ठहराया, चंदा लेने पर लगाई रोक, 6 मार्च तक जानकारी उजागर की जाए

लोकसभा चुनाव से कुछ महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 6 साल पुरानी इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को अवैध करार दिया। साथ ही इसके जरिए चंदा लेने पर तत्काल रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि बॉन्ड की गोपनीयता बनाए रखना असंवैधानिक है। यह स्कीम सूचना के अधिकार का उल्लंघन है।

सुप्रीम कोर्टके 5 जज जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने सर्वसम्मति से फैसला सुनाया। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि ‘पॉलिटिकल प्रॉसेस में राजनीतिक दल अहम यूनिट होते हैं। ऐसे में पॉलिटिकल फंडिंग की जानकारी देना आवश्यक है, जिससे मतदाता को वोट डालने के लिए सही चॉइस मिलती है। वोटर्स को चुनावी फंडिंग के बारे में जानने का अधिकार है, जिससे मतदान के लिए सही चयन होता है।
सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों को निर्देश दिया कि वे इलेक्टोरल बॉन्ड इश्यू करना बंद कर दें। साथ ही कहा कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) 12 अप्रैल 2019 से अब तक खरीदे गए इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी चुनाव आयोग को दे।
सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई को निर्देशित किया है कि वह राजनीतिक दलों का ब्योरा दे, जिन्होंने 2019 से अब तक इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए चंदा हासिल किया है। एसबीआई राजनीतिक दल की ओर से कैश किए गए हर इलेक्टोरल बॉन्ड की डिटेल दे, कैश करने की तारीख का भी ब्योरा दे। एसबीआई सारी जानकारी 6 मार्च 2024 तक इलेक्शन कमीशन को दे और इलेक्शन कमीशन 13 मार्च तक अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर इसे पब्लिश करे। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राजनीतिक चंदे की गोपनीयता के पीछे ब्लैक मनी पर नकेल कसने का तर्क सही नहीं। यह सूचना के अधिकार का उल्लंघन है। कंपनी एक्ट में संशोधन मनमाना और असंवैधानिक कदम है। 

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