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Tuesday, March 10, 2026

17-18 जनवरी को राजस्थान पुलिस साइबर हैकाथॉन 1.0 : युवा और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों को दिया मंच, भविष्य की चुनौतियों पर होगा मंथन

साइबर सुरक्षा क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने तथा युवा और प्रतिभाशाली साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों को एक मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 17 एवं 18 जनवरी को राजस्थान पुलिस साइबर हैकाथॉन 1.0 आयोजित की जा रही है। इससे पूर्व मंगलवार की शाम राजस्थान पुलिस अकादमी में आकर्षक ड्रोन शो का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम में अधिक से अधिक जनभागीदारी के प्रयास किए गए हैं।

सोमवार को पुलिस मुख्यालय पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए डीजी साइबर क्राइम, एससीआरबी एवं तकनीकी सेवाएं डॉ. रवि प्रकाश मेहरडा ने कहा कि आधारभूत सूचनाओं के डाटा को साइबर खतरों से बचाने के लिए एवं साइबर हमले में हुए जोखिम का मूल्यांकन, साइबर सुरक्षा स्थिति में सुधार, नीतियां, तकनीकी नवाचार और निरंतर सुधार आदि अति आवश्यक हैं।

मंगलवार को ड्रोन प्रदर्शन

डीजी मेहरडा ने कहा  कि हैकाथॉन से पहले 16 जनवरी को शाम 5 बजे से शहर में पहली बार राजस्थान पुलिस अकादमी परिसर में ड्रोन प्रदर्शन किया जाएगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मुख्य आतिथ्य में आयोजित इस प्रदर्शन के दौरान विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न तकनीकों से युक्त ड्रोन का परिचय कराकर अपने तकनीकी कौशल का परिचय दिया जाएगा।

300 टीमें ले रही है भाग 

डॉ. मेहरड़ा ने कहा  कि राजस्थान अंतरराष्ट्रीय केंद्र में 17 एवं 18 जनवरी को आयोजित साइबर हैकाथॉन में विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों, उद्योगों, रिसर्च लैबों और स्टार्टअप्स के 1665 प्रतिभागियों द्वारा पंजीयन करवाया गया है। इनमें लगभग 300 टीमें भाग लेगी। यह टीमें 12 साइबर सुरक्षा से संबंधित समस्याओं का समाधान निकालने के लिए 36 घंटे तक निरंतर काम करेंगी।

हैकाथॉन में इन 12 चुनोतियों पर होगा मंथन

डॉ. मेहरड़ा ने कहा  कि साइबर हैकाथॉन के दौरान साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों द्वारा भविष्य की 12 चुनौतियों पर मंथन कर हल निकालने का प्रयास किया जाएगा। इन चुनौतियों में पुलिस का फीडबैक सिस्टम विकसित करना, उन्हें एआई/एआर का प्रशिक्षण, कैमरे में एआई का उपयोग कर स्वयं निर्णय लेने में सक्षम बनाना, एफआईआर का एआई व मशीन प्रोग्रामिंग से एकदम सही अधिनियम एवं धाराएं लगाना, फर्जी वेबसाइटस, आने वाले ऐड एवं कस्टमर केयर के नंबरों की पहचान करना, निजी स्वामित्व वाले कैमरों की जियो टैगिंग करने की प्रणाली विकसित करना, फाइनेनसियल फ्रॉड के डाटा का विश्लेषण करने के लिए सॉफ्टवेयर बनाना, डीप फेक तकनीक का सहारा लेकर अपराध करने वालों को ढूंढना, 1930 हेल्पलाइन को और अधिक विकसित करना, एंटी ड्रोन सिस्टम विकसित करना, डार्क वेब पर डाटा की मोनिटरिंग एवं क्रिप्टाकरेंसी के पैसे का अनुसंधान करना रखा गया है।

20 लाख का नकद इनाम 

डॉ. मेहरड़ा ने कहा  कि इस हैकाथॉन के अंतिम चरण में तीन सर्वश्रेष्ठ टीम को समाधान प्रस्तुत करने का मौका दिया जाएगा। हर एक टीम को इवेंट के अनुसार इनाम दिया जाएगा। इन टीमों के समाधानों का मूल्यांकन विशेषज्ञ समिति द्वारा किया जाएगा। हैकाथॉन के विजेताओं को विभिन्न श्रेणियां में कुल 20 लाख रु के नगद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे। साथ ही सभी टीमों को राजस्थान पुलिस के साथ इंटर्नशिप प्रोग्राम में भी शामिल किया जाएगा।

डीजी डॉ. मेहरड़ा ने कहा  कि भविष्य की साइबर सुरक्षा के परिदृश्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक प्रमुख चुनौती के रूप में उभरा है। इसका दुरुपयोग कर ऑटोमेटेड साइबर हमला, डीप फेक तकनीक के माध्यम से साइबर वर्ल्ड में व्यक्तिगत गरिमा पर हमला एवं उपकरणों को विभिन्न टूल्स की मदद से नियंत्रण में लेना आदि कार्य साइबर अपराधियों द्वारा किये जा रहे हैं। इन चुनोतियों का सामना करने के लिए साइबर जागरूकता व नवीनतम तकनीक के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

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