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Saturday, March 7, 2026

बीजेपी की दिल्ली जीत के फॉर्मूले, अब अगली परीक्षा 2029 में लोकसभा और 2030 में विधानसभा में

2029 में लोकसभा और 2030 में विधानसभा में फिर से जीत दिला सके, वही दिल्ली का मुख्यमंत्री बनेगा।
मोदी और शाह को पता है कि केजरीवाल से मात्र 2 प्रतिशत वोट ही ज्यादा मिले है।
कांग्रेस और अन्यों को 10 प्रतिशत वोट मिले, इसलिए दिल्ली में भाजपा की जीत हो पाई।

दिल्ली। दिल्ली में विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने दिल्ली की सत्ता पर अपना कमल खिला दिया। लम्बे समय से आप पार्टी दिल्ली की सत्ता पर काबिज़ थी और इस बार बीजेपी ने बेहतर प्रदर्शन करके आप को झाड़ू से साफ़ कर दिया। पूरे देश में बीजेपी को मजबूती दिलाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह दिल्ली विधानसभा चुनाव की इस हकीकत को जानते हैं कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी से भाजपा को मात्र दो प्रतिशत वोट ज्यादा मिले है। भाजपा को 45.56 प्रतिशत तथा केजरीवाल को 43.57 प्रतिशत वोट मिले। मात्र दो प्रतिशत से ज्यादा वोट मिलने पर ही भाजपा को 70 में से 48 और केजरीवाल को 22 सीटें मिली। यह भी हकीकत है कि कांग्रेस पार्टी ने 6.34 और AIEMIM जैसी पार्टियों ने निर्दलीयों के साथ 4.53 प्रतिशत वोट हासिल किए। यदि केजरीवाल कांग्रेस और अन्य को मिले प्रतिशत को जोड़ा जाए तो 55 प्रतिशत वोट भाजपा के खिलाफ पड़े हैं। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही अब दिल्ली का मुख्यमंत्री उसे बनाया जाएगा जो 2029 में लोकसभा और फिर 2030 में विधानसभा चुनाव में भाजपा को जीत दिला सके। यह सही है कि 48 सीट मिलने से भाजपा का मुख्यमंत्री कोई भी नेता बन सकता है, लेकिन सवाल उठता है कि देश की राजधानी दिल्ली में जो चुनौतियां है उनका मुकाबला कौन कर पाएगा?
वोट प्रतिशत के साथ ही दिल्ली के विकास की भी चुनौती है। विपक्ष में रहते हुए भाजपा ने जिन मुद्दों को उठाया उन्हें अब पूरा करने की जिम्मेदारी नए मुख्यमंत्री की ही होगी। प्रवेश वर्मा जैसे विधायक को इस मुगालते में नहीं रहना चाहिए कि अरविंद केजरीवाल को हराने के कारण ही मुख्यमंत्री बना दिया जाए। यह सही है कि केजरीवाल को हराने में प्रवेश वर्मा ने खूब मेहनत की, लेकिन केजरीवाल मोदी-शाह की रणनीति और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं की घर घर दस्तक की वजह से हारे। यदि कांग्रेस उम्मीदवार दीक्षित पांच हजार वोट प्राप्त नहीं करते तो प्रवेश वर्मा का जीतना मुश्किल हो जाता। प्रवेश वर्मा मात्र चार हजार वोटों से जीते हैं। असल में पीएम मोदी और अमित शाह को पता है कि दिल्ली की चुनौतियों से किस प्रकार मुकाबला किया जा सकता है। यह अच्छी बात है कि भाजपा के जो विधायक मुख्यमंत्री बनने की इच्छा रखते हैं, उनमें से एक भी मुख्यमंत्री के पद पर दावा नहीं कर रहा। इसे भी मोदी शाह की रणनीति ही कहा जाएगा। कांग्रेस शासित कर्नाटक और हिमाचल में मुख्यमंत्री पद को लेकर नेताओं में अभी भी खींचतान हो रही है। इसके विपरीत भाजपा शासित राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में नए चेहरों को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद अब हालात शांतिपूर्ण है। इन राज्यों के वरिष्ठ भाजपा नेता कुछ दिन छटपटाहट दिखाने के बाद शांत बैठे हैं। अब ऐसे भाजपा शासित राज्य देश की विकास की मुख्यधारा से जुड़ गए हैं। दिल्ली में भी ऐसे विधायक को ही मुख्यमंत्री बनाया जाएगा जो विकास के मुद्दे पर देश की मुख्यधारा से जुड़ सके। जब नरेंद्र मोदी के चेहरे और अमित शाह की रणनीति से पूरे देश में भाजपा का परचम फैल रहा है, तब दिल्ली प्रदेश में भी मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय मोदी-शाह पर छोड़ देना चाहिए। मीडिया भले ही कितने भी नेताओं की इच्छा जाग्रत करे, लेकिन मोदी-शाह को पता है कि दिल्ली का मुख्यमंत्री कौन होगा। पीएम मोदी तो अमेरिका की यात्रा पर जा रहे है। अब अमित शाह को ही मुख्यमंत्री के नाम पर निर्णय लेना है

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