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Saturday, March 7, 2026

मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना में विभाग की बड़ी उपलब्धि, कृत्रिम गर्भाधान में प्रदेश को पहले स्थान पर लाना है – पशुपालन शासन सचिव

मोबाइल वेटरिनरी यूनिट की समीक्षा करते हुए डॉ. शर्मा ने इसके प्रभावी पर्यवेक्षण पर बल दिया और निर्देश दिया कि सेवा प्रदाता का काम निर्धारित शर्तों के अनुरूप नहीं होने पर उनके लिए कुछ दंड का प्रावधान किया जाए। उन्होंने यूनिट के कैंप मोड की व्यवस्था पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि एक कैंप में कम से कम 30 पशुओं का इलाज अवश्य होना चाहिए तभी कैंप की सार्थकता है। उन्होंने निर्देश दिया कि संचालनकर्ता फर्मों को नियमानुसार भुगतान भी समय पर सुनिश्चित किया जाए। 

डॉ शर्मा ने मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना की प्रशंसा करते हुए कहा कि योजना में विभाग ने अच्छा टीम वर्क किया है। उन्होंने अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि इस योजना में विभाग ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अब पशुओं का स्वास्थ्य प्रमाण पत्र जारी करने में तेजी लाएं। उन्होंने बीमा के लिए काम करने वाले कार्मिकों की प्रोत्साहन राशि में वृद्धि करने के निर्देश भी दिए जिससे काम में गति आ सके। उन्होंने 31 मार्च तक पशुपालकों को बीमा जारी करने लिए काम करने के निर्देश प्रदान किए जिससे पशुपालकों को बीमा का लाभ जल्द से जल्द मिलना शुरू हो सके।

अवधिपार दवाइयों की समीक्षा करते हुए डॉ शर्मा ने कहा कि पशु चिकित्सालयों में आवश्यक दवाइयों की कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री महोदय से आवश्यक दवाइयों की संख्या बढ़ाने का अनुरोध किया गया था जिसे उन्होंने तत्काल स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा कि वेटरिनरी कॉलेजों में भी इन दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी जिससे वहां शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों को इनके उपयोग की व्यवहारिक जानकारी पहले से ही हो सके और दवाइयों के बारे मे वे सीख सकें। अवधिपार दवाइयों के संबंध में अधिकारियों ने बताया कि अब केवल 8 जिलों में अवधिपार दवाइयां रह गई हैं जो कि आने वाले सप्ताह में शून्य हो जाएंगी। बाकी सभी जिलों इन दवाइयों की संख्या शून्य है।

कृत्रिम गर्भाधान विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले 15 अगस्त तक हमें कृत्रिम गर्भाधान के क्षेत्र में देश में पहले स्थान पर लाना है। उन्होंने कहा कि पशुधन में दुधारू पशुओं की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार सेक्स सोर्टेड सीमन तकनीक को बढ़ावा दे रही है। इस तकनीक से बछड़ी पैदा होने की संभावना 85 से 90 प्रतिशत तक हो जाती है। उन्होंने बताया कि सेक्स सोर्टेड सीमन के उत्पादन के लिए बस्सी में एनडीडीबी के सहयोग से लैब स्थापित किया जाएगा जिसमें स्थानीय स्तर पर सीमन का उत्पादन होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने सेक्स सोर्टेड सीमन की खरीद शुरू कर दी है। अब विभाग के अधिकारी अधिक से अधिक पशुपालकों तक इसकी पहुंच सुनिश्चित करें। 

उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में यह तकनीक किसानों तथा पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने कहा कि 10 से 12 मार्च तक विशेष अभियान चलाकर गोशालाओं के गायों की जांच करके बांझपन से ग्रसित गौवंशीय पशु एवं प्रजनन योग्य मादा गौवंशीय पशुओं का चिन्हिकरण तथा चयनित गौवंशों के लिए आवश्यकतानुसार उपचार की कार्ययोजना बनाई जाए।  

डॉ शर्मा ने कहा कि एआइ और वैक्सीनेशन कार्यक्रम तथा एमवीयू  में 15 अगस्त तक हमें देश में पहले स्थान पर होने के लिए और हमें इस दिशा में एकजुट होकर काम करना है।

जिलों में विभाग की भूमि पर अतिक्रमण की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि भरतपुर और जैसलमेर जिले ने इस मुद्दे पर बहुत अच्छा काम करते हुए विभाग की करोड़ों रुपये की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया है। अन्य जिलों को भी इस दिशा में तत्परता से काम करते हुए शेष अतिक्रमित भूमि को भी अतिक्रमण से मुक्त कराना है।

डॉ. शर्मा ने काम के प्रति लापरवाही और कोताही बरतने वाले अधिकारियों और कार्मिकों की कडे़ शब्दों में भर्त्सना करते हुए उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।   

इस राज्य स्तरीय मासिक समीक्षा बैठक में पशुपालन निदेशक तथा आरएलडीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ आनंद सेजरा, सहित विभाग के सभी वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। जिलों के संयुक्त निदेशक तथा वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी बैठक में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। 

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