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Saturday, March 7, 2026

वसुंधरा राजे को मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी? अमित शाह की रैली से बदले सियासी संकेत

राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की नाराजगी को दूर करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने प्रयास तेज कर दिए हैं। इसका ताजा उदाहरण जयपुर में आयोजित हुई केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रैली में देखने को मिला। रैली में राजे को शाह के बगल में सीट दी गई और मंच पर उन्हें विशेष महत्व प्रदान किया गया। शाह ने अपने भाषण में राजे के कार्यकाल और उनकी योजनाओं की जमकर तारीफ की, जिसे पार्टी में चल रही खींचतान को कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

पिछले कुछ समय से राजे की बीजेपी के कार्यक्रमों में अनुपस्थिति और उनकी उपेक्षा की चर्चाएं जोरों पर थीं। इसे पार्टी के अंदरूनी कलह का कारण भी माना जा रहा था। हालांकि, शाह की रैली में राजे को मंच पर विशेष स्थान और उनके कार्यों की सराहना ने साफ संदेश दिया कि बीजेपी अब राजे को फिर से मुख्यधारा में लाने की कोशिश कर रही है। रैली में सीटिंग व्यवस्था में शाह के एक तरफ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और दूसरी तरफ वसुंधरा राजे को स्थान दिया गया, जो उनकी अहमियत को दर्शाता है।राजस्थान में हाल के लोकसभा चुनावों में बीजेपी के खराब प्रदर्शन के बाद पार्टी पर दबाव है, और आगामी विधानसभा उपचुनावों में जीत के लिए राजे की लोकप्रियता को अहम माना जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, राजे को जल्द ही कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद की दौड़ में भी उनका नाम चर्चा में है। हाल की घटनाओं से संकेत मिलता है कि बीजेपी ने राजे को मनाने और उनकी नाराजगी को दूर करने के लिए ठोस रणनीति बनाई है, ताकि पार्टी की एकता और राजस्थान में स्थिति को मजबूत किया जा सके। इन सभी कयासों के बाद वसुंधरा राजे को शीर्ष नेतृत्व राष्ट्रीय अध्यक्ष की बड़ी जिम्मेदारी दे सकता है या फिर संघ की सहमति और संगठन के बड़े नेताओं के साथ सामंजस्य बैठाकर मुख्यमंत्री भी मनाया जा सकता है लेकिन ये सब संभव तभी होगा जब संघ और संगठन दोनों मिलकर सहमत हो जाए।

पिछले कुछ समय से वसुंधरा राजे और उनके गुट के लोग एक्टिव दिखाई दे रहे है। जयपुर से लेरकर दिल्ली तक के राजनीतिक गलियारों में जोरदार लॉबिंग की जाए रही है अमित शाह के जयपुर यात्रा के मायने बहुत अलग निकले जाने चाहिए। सहकार एवं रोजगार उत्सव में शाह का राजे की तारीफ करना महज एक इत्तेफाक नहीं था बल्कि इसके मायने कुछ और ही दिखाई दे रहे है।

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