देशभर में विजयादशमी यानी दशहरा इस बार 2 अक्टूबर को मनाया जाएगा। हर बार की तरह इस बार भी जगह-जगह रावण दहन की तैयारियां चल रही हैं। राजस्थान में इस बार दशहरे की आंच सिर्फ रावण के पुतले तक नहीं रही बल्कि सियासी गलियारों तक पहुंच गई है। पिछले साल बारिश में कई पुतले खराब हो गए थे, जिससे कारीगरों को काफी नुकसान हुआ था। इससे सबक लेते हुए वॉटरप्रूफ कागज़, लेमिनेटेड शीट्स और छोटे आकार के पुतले बनाये जा रहे है। पहले रावण के पुतले का कद 70-80 फीट तक पहुँच जाता था लेकिन इस बार उसे घटाकर 60 से 65 फीट तक कर दिया गया है।
निर्मल चौधरी को नहीं भाया रावण
जयपुर के कारीगरों ने इस बार रावण को राजपूती पगड़ी और लंबी मूंछों का रूप दिया है। लेकिन उनकी यह कलाकारी अब विवादों में घिर गई है। राजस्थान यूनिवर्सिटी के निर्वतमान अध्यक्ष और कांग्रेस के युवा नेता निर्मल चौधरी ने सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी आपत्ति जताई है। निर्मल ने एक अख़बार की कटिंग साझा करते हुए लिखा- “घोर निंदनीय! समाज की पहचान को ‘रावण’ की शक्ल देकर अपमानित करने की साज़िश की जा रही है। यह केवल परंपरा का मज़ाक नहीं, बल्कि पूरे समाज के अस्तित्व और अस्मिता पर किया गया घोर निंदनीय प्रहार है।”
रावण पुतला कारीगरों ने दी सफाई
गौरतलब है कि, राजपूती पगड़ी और मूंछ, राजस्थान की आन-बान-शान मानी जाती है। ऐसे में रावण के पुतले को यह रूप देने पर विवाद उठना स्वाभाविक है। आयोजन समिति के कारीगरों और आयजकों का कहना है कि, हम हर साल अलग-अलग रूप में रावण का पुतला तैयार करते हैं लेकिन इस बार हमने सोचा कि राजपूती शान वाली पगड़ी और मूंछों से रावण का चेहरा अलग और आकर्षक लगेगा।


