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Saturday, March 7, 2026

श्रीजड़खोर गुरुकुल गोधाम की अनूठी पहल, जहां सुबह मोबाइल से नहीं, वेद मंत्रों से होती है शुरूआत

भरतपुर/डीग। आधुनिक दौर में जहां युवा पीढ़ी मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया की गिरफ्त में है, वहीं राजस्थान के डीग कस्बे का श्री जड़खोर गुरुकुल एक संस्कृति-संरक्षक संस्थान के रूप में उभर रहा है। यहां मोबाइल, टीवी और तकनीकी व्यसनों से दूर बच्चों को सनातन परंपरा, वेदों की शिक्षा, और सात्विक जीवनशैली में प्रशिक्षित किया जा रहा है।

Gen Z के लिए आदर्श बन रहा गुरुकुल

जहां एक ओर नेपाल सहित कई देशों में Gen Z युवाओं की हिंसा और सामाजिक अनुशासनहीनता की खबरें सुर्खियों में हैं, वहीं डीग का यह गुरुकुल इसी पीढ़ी के बच्चों को गोभक्त, राष्ट्रभक्त और संतभक्त बनाने की दिशा में कार्यरत है। यहां पढ़ने वाले छात्रों को ‘बटुक ब्रह्मचारी’ कहा जाता है। वे 7 वर्षीय आवासीय पाठ्यक्रम में वेद, संस्कार और आधुनिक विषयों का अध्ययन करते हैं।

अनोखी दिनचर्या, अनुशासन ही आधार

गुरुकुल की दिनचर्या पूरी तरह वैदिक परंपरा पर आधारित है। ब्रह्ममुहूर्त में उठना, गो सेवा, योग और ध्यान, सूर्य नमस्कार, वेद अभ्यास, यज्ञ और हवन उनकी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा हैं। शिक्षा में संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी और गणित जैसे विषय शामिल हैं ताकि छात्र आधुनिक युग के साथ भी कदम से कदम मिला सकें।

मोबाइल और सोशल मीडिया पर सख्त प्रतिबंध

इस गुरुकुल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां मोबाइल, टीवी और कंप्यूटर पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। छात्रों को सप्ताह में सिर्फ एक बार अपने अभिभावकों से फोन पर बात करने की अनुमति होती है और महीने में एक बार माता-पिता से मिलने का अवसर दिया जाता है।

सात्विक भोजन और गो सेवा अनिवार्य

यहां पढ़ रहे बटुकों को सिर्फ सात्विक भोजन परोसा जाता है, जिसमें मांस, मदिरा, फास्ट फूड और सभी प्रकार के व्यसन पूर्णतः वर्जित हैं। गोवृत्ति प्रसाद यानी गाय से प्राप्त उत्पाद भोजन में प्राथमिकता पाते हैं। साथ ही, गो सेवा हर छात्र के लिए अनिवार्य है।

निशुल्क शिक्षा, मिशन संस्कार निर्माण

इस गुरुकुल की शिक्षा पूरी तरह निशुल्क है और इसका संचालन श्रीरैवासा धाम व वृंदावन धाम के स्वामी राजेन्द्र दास जी महाराज के मार्गदर्शन में हो रहा है। स्वामी जी का उद्देश्य है— “भविष्य की पीढ़ी को पथभ्रष्ट होने से रोककर उन्हें संस्कारवान नागरिक बनाना, जो जब भी देश को जरूरत हो, सबसे आगे खड़े हों।”

देशभर से जुटे हैं छात्र

गुरुकुल में हिमाचल, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों से बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। सभी छात्र एक ही छत के नीचे रहते हैं और एक आदर्श अनुशासनबद्ध वैदिक जीवन जीते हैं।

संस्कार और विज्ञान का संगम

श्री जड़खोर गुरुकुल न केवल एक धार्मिक या पारंपरिक संस्था है, बल्कि यह एक शिक्षा-क्रांति है, जो यह सिद्ध कर रही है कि संस्कार और विज्ञान, संस्कृति और आधुनिकता साथ-साथ चल सकते हैं।

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