अंता। राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर नरेश मीणा का नाम चर्चा में है। सरकार के खिलाफ उनके जनआंदोलन और तीखे तेवर के बाद अब वह अंता विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर सक्रिय हो गए हैं। नरेश मीणा ने साफ संकेत दिए हैं कि वह इस उपचुनाव में अपनी दावेदारी पेश करेंगे, चाहे कांग्रेस से टिकट मिले या फिर उन्हें निर्दलीय ही मैदान में क्यों न उतरना पड़े।
पिपलोदी में दिखाई जनसंवेदना
बीते दिनों झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव में एक पीड़ित परिवार को नरेश मीणा ने 1 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान की। यह धनराशि उन्हें जनसमर्थन और डोनेशन के माध्यम से प्राप्त हुई थी। इस मौके पर उन्होंने न सिर्फ पीड़ितों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट की, बल्कि राज्य सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर भी जमकर हमला बोला। उनके इस कदम ने प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल पैदा कर दी है।
चुनाव लड़ने की तैयारी, कांग्रेस से मांगा टिकट
नरेश मीणा ने अंता उपचुनाव के लिए कांग्रेस से टिकट की मांग की है। हालांकि इस बार उन्होंने न तो प्रदेश के किसी बड़े नेता से संपर्क किया है और न ही अपने करीबी माने जाने वाले सचिन पायलट से। इसके बजाय उन्होंने सीधा राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से टिकट की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर राहुल और प्रियंका को अपनी राजनीतिक सक्रियता, जनसमर्थन और लंबे समय से पार्टी में हो रही अनदेखी के बारे में अवगत कराया।
पार्टी की अनदेखी पर जताया असंतोष
नरेश मीणा का कहना है कि कांग्रेस में उन्हें लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि उन्होंने हमेशा पार्टी के लिए जमीन पर संघर्ष किया है। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी उन्होंने टिकट की मांग की, लेकिन उन्हें लगातार नजरअंदाज किया गया।
प्रमोद जैन भाया का ट्रैक रिकॉर्ड सवालों के घेरे में
अंता विधानसभा सीट से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद जैन भाया पिछले पांच चुनावों से प्रत्याशी रहे हैं, लेकिन सिर्फ 2018 में ही जीत दर्ज कर सके। 2013 और 2023 के चुनावों में उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा। इस पृष्ठभूमि में कांग्रेस के लिए नरेश मीणा जैसे जमीनी नेता को नजरअंदाज करना महंगा सौदा साबित हो सकता है।
निर्दलीय लड़ने के भी संकेत
अगर कांग्रेस पार्टी से उन्हें टिकट नहीं मिलता है तो नरेश मीणा ने निर्दलीय चुनाव लड़ने के संकेत भी दे दिए हैं। वह पहले भी पार्टी से टिकट न मिलने पर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतर चुके हैं और खासा जनसमर्थन जुटाया था। ऐसे में यदि कांग्रेस उन्हें फिर से नजरअंदाज करती है, तो इसका सीधा नुकसान उसे अंता उपचुनाव में उठाना पड़ सकता है।


