जयपुर, 12 अक्टूबर 2025। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने रविवार को कांग्रेस मुख्यालय में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र की भाजपा सरकार पर आरटीआई (सूचना का अधिकार) कानून को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया। दोनों नेताओं ने कहा कि यह कानून, जिसे यूपीए सरकार ने पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए लागू किया था, आज अपने उद्देश्य से भटक चुका है।
आरटीआई की आत्मा को किया गया कमजोर: डोटासरा
डोटासरा ने कहा कि 2014 में एनडीए सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही आरटीआई कानून पर योजनाबद्ध तरीके से हमला किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 2019 में किए गए संशोधन से इस कानून की पारदर्शिता लगभग समाप्त हो गई है। इसके साथ ही 2023 में लागू किए गए डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के तहत सार्वजनिक हित की जानकारी को गोपनीय बताकर देने से इनकार किया जा रहा है। डोटासरा ने कहा, “अब प्रधानमंत्री की डिग्री जैसी जानकारी भी आरटीआई के तहत नहीं मिल पा रही है, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।” उन्होंने आगे कहा कि पहले आम नागरिक आसानी से मनरेगा, सांसद-विधायक निधि जैसी योजनाओं की जानकारी हासिल कर पाते थे, लेकिन अब यह प्रक्रिया बेहद जटिल बना दी गई है।
सूचना आयोग को बताया निष्क्रिय
डोटासरा ने केंद्रीय सूचना आयोग की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आयोग में 11 स्वीकृत पदों में से केवल 2 पर ही नियुक्तियां हैं और मुख्य सूचना आयुक्त का पद भी रिक्त पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब आरटीआई को निष्क्रिय करने की साजिश का हिस्सा है।
व्हिसल ब्लोअर एक्ट का नहीं हुआ क्रियान्वयन
डोटासरा ने कहा कि व्हिसल ब्लोअर प्रोटेक्शन एक्ट को लागू किए जाने के वर्षों बाद भी इसे सही रूप से लागू नहीं किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते हैं, उन्हें ही सरकार की एजेंसियों के जरिए प्रताड़ित किया जाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “न खाऊंगा, न खाने दूंगा” नारे पर तंज कसते हुए कहा कि आरटीआई कार्यकर्ताओं को जेल में डाला जा रहा है और उन पर ईडी, इनकम टैक्स और सीबीआई जैसी एजेंसियों के जरिए दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि आरटीआई में किया गया 2019 का संशोधन तुरंत वापस लिया जाए।


