अहमदाबाद। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत 14 अक्टूबर से तीन दिवसीय गुजरात दौरे पर रहेंगे। यह दौरा जहां संघ की आगामी शताब्दी वर्ष की तैयारियों को अंतिम रूप देने के उद्देश्य से है, वहीं इसे राज्य की राजनीतिक हलचलों के मद्देनजर भी बेहद अहम माना जा रहा है। दौरे के दौरान भागवत अहमदाबाद में संघ कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे, आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करेंगे और भाजपा के शीर्ष नेताओं से भी चर्चा हो सकती है। खास बात यह है कि हाल ही में जगदीश विश्वकर्मा को गुजरात भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, और वे अपनी नई टीम के गठन में जुटे हैं।
शताब्दी वर्ष की तैयारियों पर विशेष ध्यान
RSS वर्ष 2025-26 में अपने स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण करेगा। इस अवसर पर पूरे देश में धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी। गुजरात इन आयोजनों का प्रमुख केंद्र रहेगा। मोहन भागवत स्वयं इन आयोजनों की तैयारी, निगरानी और दिशा-निर्देश देने के लिए राज्यों का दौरा कर रहे हैं।
राजनीतिक दृष्टिकोण से भी अहम दौरा
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह दौरा सिर्फ संघ कार्यों तक सीमित नहीं है। गुजरात में आगामी स्थानीय निकाय चुनाव और संभावित मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं के बीच यह यात्रा संघ-भाजपा के बीच तालमेल और रणनीतिक दिशा तय करने में भूमिका निभा सकती है। संघ लंबे समय से भाजपा के लिए विचार और मार्गदर्शन का स्रोत रहा है। ऐसे में मोहन भागवत की गुजरात में उपस्थिति को संगठनात्मक दृष्टिकोण के साथ-साथ राजनीतिक संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
14 अक्टूबर को अहमदाबाद आगमन
14 अक्टूबर की सुबह मोहन भागवत अहमदाबाद पहुंचेंगे। दोपहर 12:15 बजे वे हेडगेवार भवन में संघ कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, भाजपा अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा और अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहेंगे। संघ सूत्रों के अनुसार यह बैठक संगठन की भावी रणनीति और शताब्दी समारोह की तैयारियों पर केंद्रित होगी।
15 अक्टूबर को आचार्य महाश्रमणजी से मुलाकात
दूसरे दिन यानी 15 अक्टूबर को सुबह 9:30 बजे, भागवत प्रेक्षा विश्व भारती, कोबा में पूज्य आचार्य महाश्रमणजी से मिलेंगे। इसके बाद वे स्वयंसेवकों को संबोधित करेंगे और आगामी कार्यक्रमों के लिए दिशा-निर्देश देंगे। दोपहर में वे फिर से हेडगेवार भवन लौटकर दूसरी बैठक में भाग लेंगे, जिसमें संगठनात्मक रणनीतियों और सामाजिक अभियानों की रूपरेखा तय की जाएगी.


