जैसलमेर बस हादसे ने कई परिवारों की जिंदगी अंधकार में बदल दी है। पीर मोहम्मद और उनका पूरा परिवार इस हादसे में बुरी तरह झुलस गया। पीर मोहम्मद अपनी पत्नी इमामत और तीन बच्चों – इरफान, युनुस और हसीना – के साथ रिश्तेदारों के साथ जैसलमेर से भागु गांव जाने के लिए बस में सवार हुआ था। यह केवल 30 किलोमीटर की यात्रा उनके लिए मौत का सफर साबित हुई।
आग लगने के बाद गेट नहीं खुला
पीर मोहम्मद के रिश्तेदार जलालुद्दीन ने बताया कि बस में आग लगते ही अफरा-तफरी मच गई। आग तेजी से फैल गई और आगे का गेट, जो ड्राइवर के नियंत्रण में था, इलेक्ट्रॉनिक फेल होने के कारण नहीं खुल पाया। इस वजह से लोग फंसे रहे और हालात और भयावह हो गए। पीर मोहम्मद ने अपने बच्चों को ऊपर की स्लीपर सीट पर बैठाया था, जहां आग सबसे पहले फैली।
इलाज के दौरान युनुस की मौत
जलालुद्दीन के अनुसार, पीर मोहम्मद ने आग को फैलते देखा और कांच तोड़कर बचने की कोशिश की, लेकिन इरफान और हसीना गंभीर रूप से झुलस गए। युनुस का जोधपुर के MGH अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। पीर मोहम्मद और उनकी पत्नी इमामत भी गंभीर रूप से घायल हैं और अभी अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
अन्य घायलों का हाल
इस हादसे में कुल 16 लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जिनमें भागू बानो, महिपाल सिंह, ओमाराम, मनोज भाटिया, इकबाल, फिरोज, जीवराज, विशाखा, आशीष, रफीक, लक्ष्मण और उमेदुल्ला शामिल हैं। सभी घायलों को जोधपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस बीच हसीना की रास्ते में ही मौत हो गई।
बस की स्थिति पर उठे सवाल
पीर मोहम्मद ने बताया कि बस नई थी, लेकिन उसमें अजीब सी गंध आ रही थी और बस पूरी तरह भरी हुई थी। इस हादसे ने बसों की सुरक्षा और नियमों की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दर्दनाक हादसे ने शहर को झकझोर दिया
इस हादसे ने न केवल पीर मोहम्मद के परिवार की खुशियां छीनी हैं, बल्कि पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है। अपनों को खोने का दर्द पूरे शहर में व्याप्त है और यह हादसा बस यात्रा की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर चेतावनी बन गया है।


