नई दिल्ली। रोशनी का त्योहार दिवाली भले ही देशभर में उत्साह से मनाया जा रहा हो, लेकिन दिल्ली इस समय प्रदूषण के अंधेरे बादलों से घिरी हुई है। राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण लगातार सातवें दिन बेहद खतरनाक स्तर पर दर्ज किया गया। सोमवार सुबह शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के पार चला गया, जो कि ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। इससे यह स्पष्ट हो गया कि दिल्ली की हवा सांस लेने लायक नहीं रह गई है।
जहरीली हवा के साथ-साथ यमुना में भी घुला जहर
दिल्ली की पर्यावरणीय समस्याएं केवल हवा तक सीमित नहीं हैं। यमुना नदी में भी जहरीले झाग ने चिंता बढ़ा दी है। रविवार और सोमवार को कालिंदी कुंज इलाके में यमुना की सतह पर मोटी सफेद झाग की परत देखी गई, जो नदी की खूबसूरती को ढकते हुए एक गंभीर पर्यावरणीय संकट की ओर इशारा कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस बार सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि केवल NEERI द्वारा अनुमोदित ग्रीन पटाखों की बिक्री और उपयोग की अनुमति होगी।
ग्रीन पटाखों की विशेषताएं
- 30% कम प्रदूषण
- बिना सल्फर और भारी धातु के
- प्रत्येक पटाखे पर QR कोड अनिवार्य
नियमों की अनदेखी पर सख्त कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को सख्ती से लागू किया जाएगा। इस वर्ष 168 अस्थायी लाइसेंस जारी किए गए हैं। केवल NEERI और PESO द्वारा प्रमाणित पटाखों की बिक्री होगी। बिक्री की निगरानी के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं। दिवाली के बाद दुकानदारों को 2 दिन का समय दिया जाएगा ताकि वे बिना बिके पटाखों को वापस कर सकें या सुरक्षित रूप से नष्ट कर सकें। जो भी दुकानदार नियमों का उल्लंघन करेंगे, उनके लाइसेंस तुरंत रद्द किए जाएंगे।


