राजस्थान की अंता विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अब बेहद दिलचस्प हो गया है। नामांकन के आखिरी दिन बीजेपी के पूर्व विधायक रामपाल मेघवाल ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया है। उनके चुनावी मैदान में उतरने से भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए समीकरण बिगड़ने के आसार हैं। मेघवाल के समर्थकों ने आतिशबाजी कर उनके चुनावी समर में उतरने का ऐलान किया।
2013 में दर्ज की थी बड़ी जीत
रामपाल मेघवाल ने वर्ष 2013 में बारां की अटरू सीट से करीब 20 हजार मतों से जीत हासिल की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि “मैं जिले में सबसे अधिक मतों से जीता था, लेकिन भाजपा ने लगातार मेरी अनदेखी की और मुझे टिकट नहीं दिया।” उन्होंने कहा कि वे स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेंगे और “दलित, शोषित और प्रताड़ित वर्गों की आवाज बनेंगे।” साथ ही मतदाताओं से अपील की कि “सही प्रत्याशी को पहचानकर मतदान करें।”
कांग्रेस और बीजेपी दोनों के लिए चुनौती
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रामपाल मेघवाल की बगावत से भाजपा को नुकसान हो सकता है, वहीं वे कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध भी लगा सकते हैं। इस बार भाजपा से मोरपाल सुमन मैदान में हैं, जबकि कांग्रेस ने प्रमोद जैन भाया को टिकट दिया है। प्रमोद भाया की पत्नी उर्मिला जैन ने भी कांग्रेस के वैकल्पिक प्रत्याशी के रूप में नामांकन किया है।
नरेश मीणा भी चुनावी रण में
इसी के साथ एसडीएम थप्पड़ कांड से सुर्खियों में आए नरेश मीणा ने भी निर्दलीय ताल ठोकी है। कुल मिलाकर अंता उपचुनाव अब बहुकोणीय मुकाबला बन गया है, जिसमें बागी और निर्दलीयों की मौजूदगी ने सियासी समीकरणों में नया ट्विस्ट ला दिया है।


