राजधानी जयपुर के संत दुर्लभजी हॉस्पिटल में रविवार को गंभीर हंगामा हुआ, जब सड़क दुर्घटना में मृत विक्रम मीणा (42) के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर शव देने के बदले लाखों रुपए वसूलने का आरोप लगाया।
परिवार का आरोप था कि आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना के तहत इलाज से इनकार करते हुए अस्पताल ने केवल कैश में भुगतान की मांग की। करीब 13 दिन तक इलाज के बाद शनिवार को विक्रम की मौत हो गई, लेकिन परिवार ने पहले ही 6.39 लाख रुपए जमा किए होने के बावजूद प्रशासन ने 1.79 लाख रुपए और जमा करने तक शव नहीं सौंपा।
स्थिति बिगड़ने पर परिजन और ग्रामीण अस्पताल में जमा हो गए और नारेबाजी करने लगे। सूचना मिलने पर कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा सुबह करीब 10:30 बजे अस्पताल पहुंचे। उन्होंने प्रशासन से बातचीत कर मृतक का शव परिजनों को सौंपवाया और कहा, “पैसे के अभाव में किसी परिवार को शव से वंचित रखना अमानवीय है। यह केवल एक परिवार का मामला नहीं, बल्कि राज्य के स्वास्थ्य तंत्र की खामियों को उजागर करता है।”
मंत्री ने मौके पर गांधीनगर थाना पुलिस को निर्देश दिए कि पीड़ित परिवार की शिकायत पर अस्पताल प्रशासन के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए। उन्होंने कहा कि लिखित शिकायत मुख्य सचिव को दी जाएगी और जरूरत पड़ने पर इसे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के संज्ञान में भी लाया जाएगा।


