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Sunday, March 8, 2026

भाजपा की परिवर्तन यात्रा से पहले वसुंधरा की भी देव दर्शन यात्रा, ये यात्रा शीर्ष नेतृव को देगी क्या सन्देश

राजस्थान की सियासी हलकों में घमासान तब मचा हुआ दिखायी दिया जब बीजेपी की परिवर्तन यात्रा से ठीक एक दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपनी देव दर्शन यात्रा शुरू कर दी। इससे बीजेपी के गुटों में तो हड़कंप सा दिखाई दिया ही साथ ही अन्य राजनीतिक पार्टियों में में इसकी चर्चा खूब ही रही। दरअसल ये सब इसलिए हुआ क्योंकि राजस्थान में बीजेपी की परिवर्तन यात्रा के ठीक एक दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने शुक्रवार को अपनी देवदर्शन यात्रा पूरी की। इसकी शुरुआत उन्होंने राजसमंद के चारभुजा नाथ मंदिर से की। इस दौरान वसुंधरा राजे की देव दर्शन यात्रा सियासी हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। परिवर्तन यात्रा से पहले निकाली गई देवदर्शन यात्रा को वसुंधरा राजे की नाराजगी से जोड़कर भी देखा जा रहा है, और कुछ राजनीतिक विश्लेषक आइए शक्ति प्रदर्शन का भी एक तरीक़ा बता रहे हैं।

बीजेपी की परिवर्तन यात्रा के एक दिन पहले वसुंधरा राजे की देव दर्शन यात्रा से जहां बीजेपी में हड़कंप मचा हुआ है। इस बीच इसके कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। चारभुजा नाथ मंदिर में दर्शन करने के बाद वसुंधरा राजे ने नाथद्वारा में श्रीनाथ जी और बांसवाड़ा की मां त्रिपुरा सुंदरी के भी दर्शन किए। इस बीच पत्रकारों ने उनसे यात्रा को लेकर सवाल किया। इस पर उन्होंने कहा कि ‘मैं कहीं भी निकलती हूं तो, इनका आशीर्वाद लेकर कोई काम शुरू करती हूं।’ इस बीच पत्रकारों ने जैसे ही सियासी सवाल दागे, इससे पहले वसुंधरा ने अपने कार ड्राइवर को आगे चलने का इशारा कर दिया।

वसुंधरा राजे की देव दर्शन यात्रा को लेकर सियासी हलकों में जमकर हलचल मची हुई है। वहीं राजे की इस यात्रा को लेकर राजनीतिक गलियारों में उनकी नाराजगी को लेकर जोड़ा जा रहा है।

बीजेपी पहले वसुंधरा राजे को सवाई माधोपुर के त्रिनेत्र गणेश जी मंदिर से शुरू होने वाली 2 सितंबर की पहली परिवर्तन यात्रा यात्रा की कमान सौंपने की सम्भावना थी। लेकिन ऐसा किन्ही कारणो से नहीं हुआ । अब इस परिवर्तन यात्रा की शुरुआत बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा कर रहे हैं। उसके बाद वसुंधरा ने बेणेश्वर धाम से शुरू होने वाली दूसरी परिवर्तन यात्रा की कमान की इच्छा जताई। लेकिन इसकी कमान प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी के नेतृत्व में शुरू हो रही है। ऐसे में परिवर्तन यात्रा के दौरान राजे की उपेक्षा को ही उनकी देवदर्शन यात्रा का कारण माना जा रहा है।

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