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Saturday, March 7, 2026

इस बार हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा, बेहद शुभ हैं इसके संकेत..30 साल बाद बन रहे अद्भुत संयोग, पहले नवरात्र में कन्या राशि में रहेंगे सूर्य व बुध विराजमान..श्रीजी शिला माता मंदिर में घट स्थापना प्रातः 11:55 पर

शारदीय नवरात्र 2023 का शुभ आरंभ 15 अक्टूबर से होगा और समापन 23 अक्टूबर को होगा।
हिंदू धर्म में हर त्यौहार की तरह शारदीय नवरात्र का भी विशेष महत्व है। पूरे साल में 4 नवरात्र आते हैं इन में से 2 गुप्त नवरात्र होती हैं और 2 प्रकट। नवरात्र में 9 दिनों तक मां के नौ स्वरूप की पुजा की जाती है।
माता इस बार हाथी पर सवार होकर पधारेंगी और प्रस्थान घोड़े पर करेंगी। मान्यता के अनुसार, मां का हाथी पर बेहद शुभ संकेत हैं। जब भी माता हाथी पर सवार होकर आती हैं तो घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली भी आती है। लेकिन माता का घोड़े पर प्रस्थान करना शुभ संकेत नहीं हैं। माना जाता है कि घोड़ा प्राकृतिक आपदा का प्रतीक है। इसलिए मां का प्रस्थान शुभ नहीं हैं।


कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, कलश स्थापना हमेशा अभिजीत मुहूर्त और प्रतिपदा तिथि में करना ही शुभ माना गया है। इस बार 15 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त प्रातः 11:38 मिनट से शुरू हो रहा है और दोपहर 12:23 मिनट तक रहेगा। इसके उपरांत 12:24 मिनट से वैधृति योग शुरू हो जाएगा। ऐसे में इस बार शारदीय नवरात्र में कलश स्थापना के लिए मात्र 45 मिनट का ही शुभ मुहूर्त है।
राजधानी जयपुर के आमेर में स्थित जयपुर राजपरिवार की कुल आराध्य देवी श्रीजी शिला माता मंदिर में नवरात्र अश्विन प्रतिपदा रविवार को घट स्थापना प्रातः 11:55 पर होगी। माता के भक्तों को दर्शन दोपहर बाद 12:55 से होंगे।
मंदिर पुजारी पंडित बनवारी लाल शर्मा ने बताया कि मंदिर में नवरात्रि छठ का मेला शुक्रवार को भरेगा शनिवार को रात्रि 10:00 बजे से मंदिर में निशा पूजन का आयोजन होगा। जिसमें राजपरिवार के सदस्य शामिल होंगे। 22 अक्टूबर को शाम 4:30 बजे मंदिर में पूर्णाहूति होगी। वही 24 तारीख को प्रातः 10:30 बजे नवरात्रा उत्थापना होगा। इस दौरान माता के भक्तों को 16 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक प्रतिदिन प्रातः 6:00 बजे से दोपहर 12:30 तक और शाम 4:30 बजे से 8:00 तक दर्शन लाभ होंगे।


21 अक्टूबर को महानिशा पूजा

नवरात्रि पर्व पर आमेर के श्रीजी शिलामाता मंदिर में 21 अक्टूबर को रात्रि 10:00 बजे से महानिशा पूजन का आयोजन होगा। रात 11:35 से 12:26 तक निशित व्यापिनी अष्टमी मिलने के कारण इस दिन महानिशा पूजन के साथ ही बलिदान आदि का अनुष्ठान होगा। वही, 22 अक्टूबर को उदियात काल में अष्टमी तिथि मिल रही है। 23 अक्टूबर को नवमी व्रत है। जिस दिन हवन और बलिदान होगा। 24 अक्टूबर को विजयदशमी पर्व होगा। वही 28 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा और कोजागिरी लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त है।
वहीं, शहर के दुर्गापुर स्थित प्राचीन दुर्गा माता मंदिर में नवरात्र महापर्व पर प्रतिदिन दुर्गा अष्टमी स्तुति के पाठ तांत्रिक यज्ञ और हवन आदि का आयोजन किया जाएगा। मंदिर महंत पंडित महेंद्र भट्टाचार्य ने बताया कि प्रतिदिन मां को नई पोशाक धारण करवाई जाएगी। नवरात्र सप्तमी पर मंदिर में सालाना मेले का आयोजन किया जाएगा।
आमेर स्थित प्राचीन मनसा माता मंदिर में भी नवरात्र पर्व प्रतिदिन दुर्गा स्तुति के पाठ हवन और माता का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। मंदिर में आमेर के आसपास के हजारों ग्रामीण और शहरी भक्त माता के दर्शन करने आएंगे।
इसके अलावा राजधानी जयपुर में स्थित कनक घाटी मनसा माता मंदिर, चंद्रघटेश्वरी मंदिर, रामगंज बाजार, वैष्णो देवी मंदिर, राजा पार्क, झालाना डूंगरी स्थित काली माता मंदिर सहित अनेक दुर्गा मंदिरों में नवरात्र पर्व पर विशेष पूजा अर्चना, हवन के साथ माता को विशेष पोशाक धारण करवाई जाएगी।


30 साल बाद बन रहे अद्भुत संयोग, पहले नवरात्र में कन्या राशि में रहेंगे सूर्य व बुध विराजमान..
नवरात्र में अखंड ज्योत जलाने का काफी महत्व होता है। शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आ रही है। नवरात्र की शुरुआत जिस दिन से होती है, मां दुर्गा की सवारी भी उसी दिन के आधार पर होती है। हाथी को ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
शारदीय नवरात्र 15 अक्तूबर से शुरू होने जा रहे हैं।
नवरात्र में 30 साल बाद तीन अद्भुत दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। बुधाआदित्य योग, शश राजयोग और भद्र राजयोग का निर्माण हो रहा है। जयपुर के ज्योतिषाचार्य पंडित राजेन्द्र शर्मा ने बताया कि ज्योतिष गणना के अनुसार नवरात्रि के पहले दिन सूर्य और बुध कन्या राशि में विराजमान रहेंगे। ऐसे में यहां सूर्य बुध की युति से बुधाआदित्य योग का निर्माण हो रहा है। इस दिन वैद्युती योग का भी खास संयोग बन रहा है।
ज्योतिष शास्त्र में बुद्ध आदित्य योग को बहुत शुभ माना गया है। ऐसे में शारदीय नवरात्रि के पहले दिन इस योग का पूजा पाठ की दृष्टि से बहुत खास और शुभ माना गया है।
जयपुर के ज्योतिषाचार्य पण्डित नीरज शर्मा ने बताया कि सोमवार को शनि देव धनिष्ठान नक्षत्र के चौथे चरण में प्रवेश करेंगे। साथ ही 17 अक्तूबर को सूर्य का तुला राशि में गोचर होगा, जबकि 18 अक्तूबर को बुध ग्रह भी तुला राशि में प्रवेश करेंगे।
वहीं, नवरात्र में सोना- चांदी, गाड़ी खरीदना शुभ होता है। इस बार नवरात्र पूरे 9 दिन होंगे।
वैसे तो नवरात्र में किसी भी समय कलश की स्थापना कर सकते हैं। मुहूर्त सुबह 7 बजकर 13 मिनट से सुबह 9 बजकर 40 मिनट तक तथा 9 बजकर 40 मिनट से 10 बजकर 40 मिनट तक, उसके बाद अभिजीत शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 36 मिनट तक है।


हाथी पर सवार होकर आ रही मां दुर्गा..
नवरात्र में अखंड ज्योत जलाने का काफी महत्व होता है। शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आ रही है। नवरात्र की शुरुआत जिस दिन से होती है, मां दुर्गा की सवारी भी उसी दिन के आधार पर होती है। हाथी को ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। नवरात्र के दिन सुबह उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए। काले और नीले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पूजा सामग्री में रोली, मोली, चावल, लौंग, इलायची, पानी वाला नारियल, पान का पत्ता, कपूर, हल्दी की गांठ, चांदी का सिक्का, मां की चुनरी, आम के पत्ते होने चाहिए।
मां दुर्गा की आराधना का सबसे बड़ा पर्व यानि शारदीय नवरात्रि है। हिंदू धर्म में नवरात्रि के इस त्योहार का विशेष महत्व माना जाता है, जिसकी शुरुआत आश्विन मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को होती है।
इस वर्ष इस पर्व की शुरुआत 15 अक्टूबर से हो रही है और इसका समापन 23 अक्टूबर को किया जाएगा। 24 अक्टूबर को विजयदशमी का पर्व मनाया जाएगा।
नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरुपों की पूजा की जाती है।
नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक मां आदिशाक्ति के नौ स्वरुपों शैलपुत्री, ब्रह्राचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री देवी की पूजा अर्चना की जाती है।


मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप और उनकी पूजा का दिन व तारीख क्रमांक दिनांक दिन स्वरूप..
नवरात्रि का पहले दिन
15 अक्टूबर 2023
रविवार
मां शैलपुत्री पूजा (घटस्थापना)
नवरात्रि का दूसरा दिन
16 अक्टूबर 2023
सोमवार
मां ब्रह्मचारिणी पूजा
नवरात्रि का तीसरा दिन
17 अक्टूबर 2023
मंगलवार
मां चंद्रघंटा पूजा
नवरात्रि का चौथा दिन
18 अक्टूबर 2023
बुधवार
मां कुष्मांडा पूजा
नवरात्रि का पांचवां दिन
19 अक्टूबर 2023
गुरुवार
मां स्कंदमाता पूजा
नवरात्रि का छठवां दिन
20 अक्टूबर 2023
शुक्रवार
मां कात्यायनी पूजा
नवरात्रि का सातवं दिन
21 अक्टूबर 2023
शनिवार
मां कालरात्रि पूजा
नवरात्रि का आठवां दिन
22 अक्टूबर 2023
रविवार
मां महागौरी पूजा
नवरात्रि का नौवां दिन
23 अक्टूबर 2023
सोमवार
मां सिद्धिदात्री पूजा

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