फेस्टिव सीजन के साथ साइबर धोखाधड़ी भी तेज हो गई है। नवरात्रि-दीवाली जैसे त्योहारों में जब खरीदारी और पैसों के लेन देने की गतिविधियाँ बढ़ती हैं, तब जालसाज़ों के निशाने पर आम लोग आते हैं — और अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर धोखे और भी व्यक्तिगत और भरोसेमंद दिखने लगे हैं।
सीमा (बदला हुआ नाम), जो एक कंपनी में एचआर हैं, त्योहारों की छुट्टी से पहले काम निपटा रही थीं जब उन्हें वॉट्सऐप पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया। उस नंबर पर उनकी रूममेट की डिस्प्ले फोटो लगी थी और संदेश में 6,000 रुपये मांगे गए — ‘मेरा यूपीआई काम नहीं कर रहा, माँ के लिए सूरत में फूड प्रोसेसर चाहिए’ जैसी कहानी। सीमा ने यह मान लिया कि यह उनके परिचित की रिक्वेस्ट है और पैसे भेज दिए। बाद में पता चला कि वह मैसेज जालसाज़ों का था — यानी सीमा के साथ धोखा हुआ।
इकोनॉमिक टाइम्स और साइबर सिक्योरिटी कंपनियों के हवाले से बताया जा रहा है कि GenAI और मशीन लर्निंग टूल्स का इस्तेमाल कर अब फिशिंग संदेश, लक्षित सामाजिक इंजीनियरिंग और व्यक्तिगत संदर्भों में काफी सटीक हमला बनाए जा रहे हैं। कई कंपनियों ने त्योहारों के दौरान हमलों में लगभग 40% की बढ़ोतरी और इनमें से करीब 15% हमलों को व्यवहार आधारित बताया है — यानी ऐसे हमले जो खरीदारी/सर्च पैटर्न और रिश्तों के संदर्भों का फायदा उठाते हैं।
जिनसे अब ठगी होती है
• नकली प्रोफाइल फ़ोटो और क्लोन अकाउंट: किसी परिचित की तस्वीर या नाम लगाकर संदेश भेजना।
• लक्षित फिशिंग लिंक: यूज़र की सर्च/खरीदारी के हिसाब से बनाया गया लिंक।
• ट्रोजन युक्त ई ग्रीटिंग/कार्ड: त्योहार के कार्ड में छुपे मालवेयर से वॉट्सऐप/कॉन्टैक्ट्स हैक होना और ऑटो मैसेज।
• भावनात्मक शोषण: छोटा सा अनुरोध या आपातकालीन स्कैम — लोग सोचते हैं कि रकम कम है, इसलिए भेज देते हैं।
क्या करें
संदेह होने पर कॉल कर पुष्टि करें — किसी भी पैसे की रिक्वेस्ट पर सीधे उस व्यक्ति को फोन करें; केवल संदेश पर भरोसा न करें।
1. UPI/बैंक वेरिफिकेशन — अगर किसी का UPI काम नहीं कर रहा तो विकल्प पूछें — नकद नहीं, सीधे बैंक/यूपीआई पर ट्रांज़ैक्शन देखें।
2. लिंक या अटैचमेंट न खोलें — अनजान ई कार्ड या डाउनलोड करने वाले लिंक पर टैप न करें।
3. दो स्तरीय ऑथेंटिकेशन (2FA) सक्रिय करें — वॉट्सऐप और बैंकिंग ऐप्स में 2FA/पासकोड लगाएँ।
4. कॉन्टैक्ट्स को सचेत करें — अगर आपका वॉट्सऐप हैक हो जाए तो तुरंत कॉन्टैक्ट्स को सचेत करें ताकि वे पैसों की रिक्वेस्ट पर ध्यान दें।
5. बैंक और पुलिस को तुरंत रिपोर्ट करें — ट्रांज़ैक्शन हो चुका है तो बैंक को कॉल करें और साइबर क्राइम पोर्टल/नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराएँ।
6. नंबर ब्लॉक/रिपोर्ट करें — वॉट्सऐप पर नंबर ब्लॉक करें और रिपोर्ट करें ताकि अन्य लोग साथ बच सकें।


