जयपुर। जयपुर नगर निगम ग्रेटर की प्रस्तावित एक्जीक्यूटिव कमेटी (ईसी) की बैठक में उस समय हंगामा मच गया, जब एक सड़क और पार्क का नामकरण ‘अमर सुखदेव सिंह गोगामेड़ी’ के नाम पर करने का प्रस्ताव चर्चा के लिए आया। इस प्रस्ताव पर भाजपा और कांग्रेस के पार्षदों ने एकजुट होकर विरोध जताया, जिसके कारण बैठक शुरू होने से पहले ही स्थगित कर दी गई। मेयर सौम्या गुर्जर ने प्रस्ताव भेजने वाले की पहचान सार्वजनिक नहीं की, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इस विवादास्पद प्रस्ताव के पीछे किसकी मंशा थी।
कुल 18 प्रस्तावों में नामकरण और प्रमोशन प्रमुख मुद्दे
बैठक में कुल 18 प्रस्ताव चर्चा के लिए शामिल थे। इनमें से 12 प्रस्ताव शहर की सड़कों, पार्कों और मार्गों के नामकरण से संबंधित थे, जबकि शेष 6 प्रस्ताव निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रमोशन से जुड़े थे। आमतौर पर ईसी की बैठकें आपातकालीन और जनता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर निर्णय लेने के लिए होती हैं, लेकिन इस बार प्रस्तावों को लेकर पार्षदों में नाराजगी देखी गई।
सबसे विवादित प्रस्ताव रहा ‘सुखदेव सिंह गोगामेड़ी’ का नामकरण
सर्वाधिक विवाद प्रस्ताव नंबर 6 को लेकर हुआ, जिसमें महाराणा प्रताप सर्किल से द्वारकापुरी सर्किल तक के मार्ग और वार्ड 118 (घंरोदा) सेक्टर-29, प्रतापनगर स्थित पार्क का नाम ‘सुखदेव सिंह गोगामेड़ी’ के नाम पर करने की मंजूरी मांगी गई थी। यह प्रस्ताव श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना की ओर से भेजा गया था और मेयर सौम्या गुर्जर ने इसे बैठक के एजेंडे में शामिल किया था। सुखदेव सिंह गोगामेड़ी श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के संस्थापक माने जाते हैं।
विपक्षी नेता राजीव चौधरी ने जताया विरोध
विपक्ष के नेता राजीव चौधरी ने इस प्रस्ताव को “शर्मनाक” बताते हुए सवाल उठाया कि मेयर ने इसे एजेंडे में क्यों शामिल किया। उन्होंने कहा कि निगम का कार्यकाल खत्म होने के करीब है, ऐसे में जनता से जुड़े जरूरी मुद्दों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी। चौधरी ने कहा कि दीपावली जैसे महत्वपूर्ण त्योहार को लेकर भी चर्चा होनी चाहिए थी, लेकिन इस बैठक में ऐसे किसी भी मुद्दे को शामिल नहीं किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि निगम में करीब 5,000 फाइलें लंबित हैं, जिन्हें प्राथमिकता देनी चाहिए।
कार्यकाल में कम बैठकें, जनता से जुड़े मुद्दे दरकिनार
चौधरी ने यह भी कहा कि पांच साल के कार्यकाल में कम से कम 20 ईसी बैठकें होनी चाहिए थीं, लेकिन मेयर ने चार से भी कम बैठकें पूरी कीं। इससे यह स्पष्ट होता है कि जनता से जुड़े आवश्यक मुद्दों को नजरअंदाज किया जा रहा है।


