जोधपुर। सूर्यनगरी इन दिनों सांस्कृतिक रंगों में सराबोर है। हाल ही में संपन्न हुए राजस्थान अंतरराष्ट्रीय फॉक फेस्टिवल (रिफ) की धुनें अब भी लोगों के दिलों में गूंज रही हैं, वहीं अब दो दिवसीय मारवाड़ फेस्टिवल ने शहर में नया उत्साह भर दिया है। इसी के साथ जोधपुर आर्ट वीक भी लगातार आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
रिफ का रंगीन समापन
रिफ के 18वें संस्करण का समापन सोमवार सुबह जसवंत थड़ा पर हुआ। इससे पहले रविवार रात मेहरानगढ़ के जनाना कोर्टयार्ड में कलाकारों की जबरदस्त जुगलबंदी देखने को मिली। भूटान, कजाकिस्तान, पोलैंड, पुर्तगाल, कनाडा जैसे देशों से आए कलाकारों ने जब राजस्थानी लोक संगीत के साथ इंग्लिश और इंटरनेशनल बीट्स को मिलाया तो श्रोता झूम उठे। यह पहली बार था जब इंग्लिश गीतों के साथ राजस्थानी सुरों का फ्यूजन इतने भव्य स्तर पर पेश किया गया।

मारवाड़ फेस्टिवल का भव्य शुभारंभ
सोमवार सुबह सूर्य आराधना और योग प्रदर्शन के साथ मारवाड़ फेस्टिवल की शुरुआत हुई। हेरिटेज वॉक में सैकड़ों प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और पुरानी गलियों व हवेलियों की संस्कृति को करीब से जाना। उम्मेद स्टेडियम में बीएसएफ के कैमल टैटू शो और वेपन डिस्प्ले ने दर्शकों का ध्यान खींचा। सजे-धजे ऊंटों की परेड ने पर्यटकों में खासा उत्साह भर दिया।
पहले दिन की पारंपरिक प्रतियोगिताएं
मारवाड़ फेस्टिवल के पहले दिन स्टेडियम में मूंछ प्रतियोगिता, पगड़ी बांधना, मिस मारवाड़, रस्साकशी, मटका दौड़ जैसी रोचक प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। साथ ही राजस्थानी व्यंजन और हस्तशिल्प प्रदर्शनी ने लोक कला प्रेमियों को आकर्षित किया। शाम को सांस्कृतिक संध्या में लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को बांधे रखा।
दूसरे दिन ओसियां गांव बना केंद्र
फेस्टिवल के दूसरे दिन मंगलवार को ओसियां गांव में ग्रामीण खेल प्रतियोगिताएं और पतंग प्रदर्शन हुए। दोपहर में ऊंट सफारी का आयोजन किया गया, जहां पर्यटकों ने थार के धोरों का लुत्फ उठाया। शाम को फूड एंड क्राफ्ट प्रदर्शनी लगी, जहां स्थानीय खानपान और हस्तशिल्प की विविधता देखने को मिली। शाम 7 से रात 9 बजे तक की सांस्कृतिक संध्या में लोक और आधुनिक कलाकारों ने मंच संभाला। समापन के रूप में धोरों में आतिशबाजी ने आसमान को रंगों से भर दिया और दर्शकों ने तालियों के साथ विदाई दी।


