राष्ट्रीय शिक्षा अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् (NCERT) ने हाल ही में शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहल की है, जिसका उद्देश्य इतिहास के ‘स्वदेशी आंदोलन’ को आज के आत्मनिर्भर भारत के विचार से जोड़ना है। इसके लिए दो विशेष शैक्षिक मॉड्यूल्स प्रकाशित किए गए हैं ‘स्वदेशी: वोकल फॉर लोकल’ – मध्यम कक्षाओं के लिए ‘स्वदेशी: आत्मनिर्भर भारत के लिए’ – माध्यमिक स्तर के छात्रों के लिए इन मॉड्यूल्स का मकसद सिर्फ अतीत का अध्ययन कराना नहीं, बल्कि छात्रों को राष्ट्र निर्माण के विचार से जोड़ना और आत्मनिर्भरता का भाव जाग्रत करना है।
1905 से लेकर 2025 तक की यात्रा
इन मॉड्यूल्स में छात्रों को 1905 के बंगाल विभाजन के विरोध से लेकर आज के आत्मनिर्भर भारत अभियान तक की कहानी पढ़ने को मिलेगी। स्वदेशी आंदोलन को केवल विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि उसे भारतीय विकल्पों को खड़ा करने के आंदोलन के रूप में दिखाया गया है। बंगाल के रसायन उद्योग और तारापुर के इस्पात उपक्रम को ऐतिहासिक मिसाल के रूप में पेश किया गया है।
🇮🇳 प्रधानमंत्री मोदी का संदर्भ और शिक्षकों को “होमवर्क”
मॉड्यूल्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2025 के स्वतंत्रता दिवस भाषण का अंश भी जोड़ा गया है, जिसमें उन्होंने कहा था:
“आत्मनिर्भर भारत, विकसित भारत की आधारशिला है”
साथ ही उन्होंने देश के शिक्षकों से एक विशेष “होमवर्क” की अपील की — कि वे बच्चों के साथ मिलकर स्वदेशी उत्पादों का प्रचार करें और ‘वोकल फॉर लोकल’ मुहिम को आगे बढ़ाएं।
गांधी, टैगोर और शिक्षा में स्वदेशी की सोच
मॉड्यूल्स में यह भी बताया गया है कि महात्मा गांधी ने शिक्षा में स्वदेशी को आत्मनिर्भरता की कुंजी माना था, और रवीन्द्रनाथ टैगोर ने इसे “स्वतंत्रता का सच्चा मानदंड” कहा था। ये मॉड्यूल्स केवल इतिहास की जानकारी नहीं देते, बल्कि यह दिखाते हैं कि कैसे ‘स्वदेशी’ आज के भारत के लिए एक सामरिक सोच बन चुका है।


