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Saturday, March 7, 2026

प्रधानमंत्री मोदी का ‘मन की बात’: डिजिटल अरेस्ट से बचने के लिए सतर्क रहें, सोचें, फिर करें एक्शन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 115वें संस्करण में देशवासियों को साइबर ठगी के बढ़ते मामलों पर चेताया और उनसे डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक होने की अपील की। पीएम मोदी ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर हो रही ठगी की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, आरबीआई या नारकोटिक्स विभाग का अधिकारी बताकर कॉल करते हैं और लोगों को धमकाकर बड़ी धनराशि ऐंठ लेते हैं।

प्रधानमंत्री ने बताया कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर किसी को धमकाकर पैसे नहीं मांगती है। साइबर अपराधी तीन चरणों में इस तरह की ठगी को अंजाम देते हैं:

  1. व्यक्तिगत जानकारी हासिल करना: ठग किसी भी तरह से आपकी व्यक्तिगत जानकारी एकत्र करने का प्रयास करते हैं।
  2. डर का माहौल बनाना: कॉल पर ठग आत्मविश्वास से बात करते हैं और गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं ताकि आप घबरा जाएं।
  3. समय का दबाव डालना: वह आपको जल्दबाजी में निर्णय लेने के लिए मजबूर करते हैं, जिससे आप सोच-समझ नहीं पाते।

प्रधानमंत्री ने देशवासियों से कहा कि किसी भी संदिग्ध कॉल पर डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने सुरक्षा के लिए तीन मुख्य चरण सुझाए हैं – रुकें, सोचें, और कार्रवाई करें। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि वे स्क्रीनशॉट और रिकॉर्डिंग लें और तत्काल 1930 नंबर पर कॉल करके या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें।

CERT-In ने जारी की एडवायजरी

भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (सीईआरटी-एन) ने डिजिटल ठगी से बचने के उपाय बताते हुए एडवायजरी जारी की है। उन्होंने डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन ठगी से बचाव के कई टिप्स साझा किए:

  • सतर्क रहें: कोई भी सरकारी एजेंसी वॉट्सएप या स्काइप जैसे प्लेटफॉर्म पर आधिकारिक संचार नहीं करती। ठग अक्सर इन्हीं माध्यमों का उपयोग करते हैं।
  • ध्यान न दें: ठग पीड़ितों को मनी लॉन्ड्रिंग या अन्य अपराधों का डर दिखाकर कॉल या ईमेल भेजते हैं। ऐसे संदेशों पर ध्यान न दें।
  • घबराएं नहीं: ठग गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं, परंतु बिना किसी आधार के उनसे कोई बैंक या यूपीआई डिटेल शेयर न करें।
  • जल्दबाजी न करें: ठगों के सवालों का जवाब देने में जल्दबाजी न करें। शांत रहकर उनकी बातों का आकलन करें।
  • फिशिंग से बचें: अनजान ईमेल लिंक पर क्लिक न करें, ये आपके कंप्यूटर पर हमला कर सकते हैं और आपकी व्यक्तिगत जानकारी चुरा सकते हैं।

डिजिटल अरेस्ट क्या है?

‘डिजिटल अरेस्ट’ एक नई तरह की साइबर ठगी है, जिसमें अपराधी वीडियो या ऑडियो कॉल के माध्यम से खुद को कानून या प्रवर्तन अधिकारी बताते हैं और लोगों में भय पैदा करते हैं। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, साइबर अपराध के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। 2017 में जहां 3,466 केस दर्ज हुए थे, वहीं 2023 में अब तक 11.28 लाख मामले दर्ज हो चुके हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ में देशवासियों को सचेत किया कि इस प्रकार के फर्जी कॉल्स से सावधान रहें और डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक रहें।

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