राजस्थान में स्लीपर बस संचालकों की हड़ताल लगातार तीसरे दिन भी जारी रही और अभी तक इसका कोई समाधान नहीं निकल सका है। सोमवार को बस संचालकों के तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने डिप्टी सीएम डॉ. प्रेमचंद बैरवा से भी मुलाकात की।
संचालकों का कहना है कि उनके वाहनों पर अत्यधिक राशि के चालान किए जा रहे हैं और खामियां सुधारने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा। इस पर डिप्टी सीएम बैरवा ने साफ कहा कि यात्री सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिन बसों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा है, उन्हीं पर कार्रवाई की जा रही है। 1 से 1.5 लाख रुपये तक के चालानों के मामलों के संबंध में उन्होंने रिपोर्ट मांगी है।
हड़ताल का प्रभाव
राज्य में करीब 8 हजार स्लीपर बसें बंद हैं, जिसके चलते रोजाना लगभग 3.20 लाख यात्रियों को परेशानी हो रही है। सिर्फ जयपुर में ही 1 हजार से ज्यादा बसें खड़ी हैं और करीब 40 हजार यात्री प्रभावित हो रहे हैं। बस संचालक अधिक चालान राशि और सुधार के लिए समय न मिलने का मुद्दा उठा रहे हैं। 1 नवंबर से शुरू हुई इस हड़ताल में अब अन्य परिवहन संगठनों के भी शामिल होने की संभावना है।
स्टेज कैरिज यूनियन का समर्थन
स्टेज कैरिज यूनियन के नेता सत्यनारायण साहू ने हड़ताल को समर्थन दे दिया है। बताया जा रहा है कि 4 नवंबर से स्टेज कैरिज और लोक परिवहन बसें भी आंदोलन में शामिल हो सकती हैं। यदि ऐसा होता है तो करीब 30 हजार अतिरिक्त बसें संचालन बंद कर देंगी, जिससे आम जनता को और अधिक परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
सरकार का रुख
राज्य सरकार की ओर से स्पष्ट संदेश दिया गया है कि यात्री सुरक्षा सर्वोपरि है और बसों पर नियमों के तहत कार्रवाई जारी रहेगी। हालांकि, वार्ता के बाद बस संचालकों ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही समाधान निकल सकता है।


