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Saturday, March 7, 2026

लोकतंत्र पर तकनीकी साम्राज्यवाद की छाया और बचाव – डॉ डीपी शर्मा

तकनीकी प्रगति ने निस्संदेह हमारे जीवन में क्रांति ला दी है और हम समय चक्र के साथ कभी भी पीछे नहीं जा सकते / इस सत्य से परे प्रगति के इन तकनीकी आवरणों के नीचे एक स्याह वास्तविकता भी छिपी है तकनीकी साम्राज्यवाद की। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स एवं सिंगुलेरिटी तो इसके मात्र कुछ उदाहरण हैं। मुख्य रूप से सूरज की डूबने की दिशा में खड़े मुट्ठी भर शक्तिशाली कॉरपोरेट्स और उनके तकनीकी आकाओं द्वारा संचालित यह तकनीकी साम्राज्यवाद की आर्टिफिशियल शुगबुगाहट कहीं लोकतांत्रिक संस्थाओं की नींव को खतरे में तो नहीं डाल रही? यह प्रश्न खतरनाक भी है और सोचनीय भी।

यूं कहें कि इस ख़तरे का मूल मंत्र सत्ता के केंद्रीकरण में निहित है तो गलत नहीं होगा। कुछ तकनीकी दिग्गज जैसे ईलोन मस्क, बिल गेट्स, सुंदरम पिचाई एवं जकरबर्ग वैश्विक संचार, डेटा प्रवाह और यहां तक ​​कि हमारे विचारों पर अभूतपूर्व प्रभाव डालने के नवीन तंत्रों एवं तकनीकों का विकास कर हमें एक नई दुनिया की तरफ तो नहीं ले जा रहे हैं। यह गलत भी नहीं है। विकास तो होगा ही। मगर सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म, जो हमें जोड़ने के लिए डिज़ाइन किए गए थे, गलत सूचना, हेरफेर और सार्वजनिक प्रवचन के क्षरण के लिए आज प्रजनन तंत्र का आधार बन कर रह गए हैं। सोशल मीडिया आज झूठ और शंका के साथ अपनी सुबह शुरू करता है और शाम तक बच्चों के बचपन, महिलाओं की शांति और पुरुषों के सुकून को निगल कर रात्रि विश्राम में चला जाता है। तकनीकी तंत्र और उनके एल्गोरिदम, जो हमारी सेवा के लिए बने थे, अब उन कॉरपोरेट्स के हितों की सेवा करते हैं जो नेपथ्य में तकनीकी साम्राज्यवाद का खेल खेल रहे हैं। वे अब हमारे ऑनलाइन अनुभवों को कभी सुकृत एवं कभी विकृत आकार दे देते हैं और मौजूदा पूर्वाग्रहों को मजबूत करते रहते हैं।

आज तकनीकी कॉरपोरेट्स के द्वारा खेला जाने वाला डाटा एवं सूचना केंद्रित खेल और उसके पीछे के जटिल तकनीकी मॉडल डिजिटल प्रभुत्व, आर्थिक और राजनीतिक साम्राज्यवाद की ओर धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं। ये कॉरपोरेट्स मुफ्त की सुविधाओं के शिगूफों से व्यक्तिगत डेटा का विशाल भंडारण करते हैं, और फिर व्यक्तियों को वस्तुओं में बदल देती हैं यानी उनके लिए व्यक्ति का डाटा और व्यक्ति स्वयं व्यापारिक वस्तु के अलावा कुछ भी नहीं। फिर इस डेटा का उपयोग लक्षित विज्ञापन के लिए किया जाता है, जो उपभोक्ता व्यवहार और यहां तक ​​​​कि राजनीतिक परिणामों को प्रभावित करता है। इसके अलावा, ये तकनीकी कॉरपोरेट्स पर्दे के पीछे से सरकारों पर भारी दबाव डालते हैं, पैरवी करते हैं, अनुकूल नियमन और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर करते करते सरकारों पर इतना हावी हो जाते हैं कि सरकार अंततः इनकी कठपुतलियां बन के रह जाती हैं इसे ही कहते हैं- तकनीकी दुनियां का राजनीतिक डार्क जोन यानी तकनीकी साम्राज्यवाद या “डीप स्टेट”।

गोपनीयता का भंग

आज जब भी हम कोई सोशल मीडिया पर अकाउंट खोलते हैं तो हमारे सैकड़ो पैरामीटर अपने आप आप दूसरे के हाथों में ना चाह कर भी चले जाते हैं। इसके बाद हमारे सबसे अंतरंग विवरण पर्याप्त सहमति या निरीक्षण के बिना एकत्र और विश्लेषण किए जाते हैं, जिससे हम हैकिंग या अन्य किसी साइबर क्राइम का शिकार हो जाते हैं।

असहमति के खिलाफ कुचक्र

यह कॉरपोरेट्स एवं सूचना तकनीकी के जॉइंट तंत्र सूचनाओं को सेंसर भी कर सकते हैं, आलोचनात्मक आवाजों को दबा सकते हैं और जनता की राय में हेरफेर भी कर सकते हैं, और विचारों के मुक्त आदान-प्रदान में बाधा डाल सकते हैं । इन सभी तंत्रों से लोकतंत्र को बचाए रखने की आज सबसे बड़ी आवश्यकता है।

लोकतंत्र को कमजोर करना

आज दुनिया में डिस इनफॉरमेशन और मिस इनफॉरमेशन का तूफान चल रहा है। चुनावों पर इन तूफानों का प्रभाव, गलत सूचना के प्रसार के साथ, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अखंडता और लोगों की इच्छा को खतरे में डालता चला जा रहा है।

डिजिटल विभाजन

यूं तो दुनियां के विकासशील देशों में प्रौद्योगिकी और डिजिटल साक्षरता तक असमान पहुंच मौजूदा असमानताओं को बढ़ाती है, जिससे दो-स्तरीय समाज का निर्माण होता है, जहां कुछ सशक्त हैं जबकि अन्य हाशिए पर हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए इंटरनेट सोसाइटी जेनेवा द्वारा तय किया जा रहे मानको द्वारा बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है जो समान अवसर, अधिकार संरक्षण एवं पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करते हुए इस विभेद की खाई को पाट सके।

डेटा गोपनीयता और सुरक्षा

यूं तो हर देश के लिए मजबूत डेटा संरक्षण कानून महत्वपूर्ण हैं, जो व्यक्तियों को उनकी व्यक्तिगत जानकारी पर अधिक नियंत्रण प्रदान करते हैं और इसका उल्लंघन करने वाले तंत्रों को इसके दुरुपयोग के लिए जिम्मेदार ठहराते हैं।

अविश्वास नियम

तकनीकी एकाधिकार के प्रभुत्व को तोड़ने से प्रतिस्पर्धा और नवाचार को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे सत्ता की एकाग्रता को रोका जा सकता है।

मीडिया साक्षरता

नागरिकों को उनके ऑनलाइन अनुभवों को आकार देने वाले एल्गोरिदम और जानकारी में हेरफेर करने के लिए उपयोग की जाने वाली तकनीकों के बारे में शिक्षित करना महत्वपूर्ण सोच और सूचित निर्णय लेने के लिए आवश्यक है। समाज और सरकारें इस हेतु व्यापक स्तर पर अवेयरनेस कैंप चलाकर इस खतरे को कम कर सकते हैं ‌

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एवं एकीकरण के लिए यूनाइटेड नेशंस द्वारा स्थापित “इंटरनेट गवर्नेंस फॉरम” जैसी इकाइयां डिजिटल युग के लिए सामान्य मानकों और विनियमों को विकसित कर, सभी देशों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक सहयोग स्थापित कर सकतीं हैं। यद्यपि तकनीकी साम्राज्यवाद कोई अपरिहार्य नियति नहीं है। खतरों को पहचानकर और निर्णायक कार्रवाई कर हम लोकतंत्र, स्वतंत्रता और समानता के सिद्धांतों की रक्षा करते हुए मानवता की भलाई के लिए प्रौद्योगिकी की शक्ति का उपयोग कर सकते हैं।

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