भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में 18 दिन गुजारने के बाद धरती पर लौट चुके हैं। इन दिनों वें इन दिनों डॉक्टरों की निगरानी में है और चलना सीख रहे है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए उन्होंने इस बात की जानकारी दी। उन्होंने पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि वापसी के बाद सीधा चलना जैसे साधारण काम भी चुनौती बन जाते हैं। आपकी प्रतिक्रिया की गति कम हो जाती है और संतुलन बिगड़ जाता है।
हालांकि ये सभी अस्थायी होते हैं। अंत में उन्होंने लिखा कि यह स्पलैशडाउन के ठीक बाद की तस्वीर है। इसमें अंतरिक्ष से वापसी के बाद फिर से चलना सीख रहा हूं। शुभांशु शुक्ला ने लिखा कि आपकी संतुलन प्रणाली को नए माहौल में खुद को ढालना पड़ता है। हालांकि शरीर जल्दी ही खुद को इस नए वातावरण में ढाल लेता है और अंतरिक्ष यात्री ठीक महसूस करते हैं। यह बदलाव तब होते हैं जब हम पृथ्वी पर वापस आते हैं।

इन प्रभावों को इसलिए समझना जरूरी है क्योंकि इससे लंबी अंतरिक्ष उड़ानों के लिए समाधान तैयार किए जा सकते हैं। हम गुरुत्वाकर्षण के वातावरण में बड़े होते हैं। हमारा शरीर इसके अलावा कुछ और नहीं जानता। गुरुत्वाकर्षण रहित (माइक्रोग्रैविटी) में रहने का हमारे शरीर पर कई तरह से असर पड़ता है। शरीर में द्रव की कमी, दिल की धड़कन धीमी हो जाना क्योंकि उसे आपके सिर तक खून पहुंचाने के लिए गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध काम नहीं करना पड़ता।


