बिहार चुनाव की तारीखों का अभी ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन राजनीतिक पार्टियां पहले से ही रणनीति बनाने में जुटी हैं। इस बार बिहार के चुनाव में कौन सा गठबंधन किस पार्टी को कितनी सीटें देगा, इस पर तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है।
इस चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM भी अहम भूमिका निभा सकती है। ओवैसी खुद इस बात का अंदाजा लगा चुके हैं और इसी वजह से वे RJD से लगातार सीट शेयरिंग पर बातचीत कर रहे हैं। हाल ही में ओवैसी ने RJD को 6 सीटों का प्रस्ताव रखा है और कहा है कि उन्हें इंडिया गठबंधन के साथ चुनाव लड़ने के लिए सिर्फ 6 सीटें चाहिए। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव को इस ऑफर को स्वीकार करना चाहिए, अन्यथा स्पष्ट हो जाएगा कि आखिर कौन बीजेपी की मदद कर रहा है।
ओवैसी ने तेजस्वी यादव को एक पत्र भी लिखा है, जिसमें उन्होंने साफ तौर पर कहा कि AIMIM सिर्फ 6 सीटों की मांग के साथ गठबंधन के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर RJD गठबंधन नहीं करता, तो बिहार के लोग समझ जाएंगे कि कौन भाजपा का साथ दे रहा है। इस बार बिहार में एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है।
आपको बता दें कि 2020 में AIMIM ने बिहार विधानसभा चुनाव में 5 सीटों पर जीत हासिल की थी। उसके एकसाथ 5 सीट पर खाता खुलने से सभी दल चौंक गए थे। क्योंकि पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज ऐसे जिले हैं, जहां 24 विधानसभा सीटें हैं और वह भी सबसे संवेदनशील कैटेगरी में आती हैं। यहां मुस्लिम आबादी 38% से लेकर 70% तक है। 2020 में AIMIM का प्रदर्शन यहां काफी बेहतर था। हालांकि उसके 4 विधायक बाद में RJD में लौट आए। RJD मानती है कि मुस्लिम-यादव का उसका पारंपरिक वोट बैंक ही NDA को रोकने के लिए काफी है।


