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Saturday, March 7, 2026

निम्बली गांव: सामाजिक समरसता की अनोखी मिसाल, वाल्मीकि और बावरी परिवार ने किया मंदिर में ऐतिहासिक योगदान

पाली। पाली जिले की मारवाड़ तहसील का 7 हजार जनसंख्या वाला छोटा सा गांव निम्बली इन दिनों सामाजिक समरसता और भाईचारे के अद्भुत उदाहरण के लिए चर्चा में है। गांव में 30 से अधिक जातियों के लोग रहते हैं, जिनमें राजपूत, गुर्जर, जैन, वाल्मीकि, बावरी, मीणा, और कालबेलिया जैसे समुदाय शामिल हैं। इस विविधता को एकता में बदलने का काम किया है शीतला माता मंदिर ने, जहां प्राण-प्रतिष्ठा उत्सव के दौरान वाल्मीकि और बावरी समाज ने अपनी भागीदारी से नया इतिहास रच दिया।

मंदिर पर ध्वजा और शिखर का ऐतिहासिक आयोजन
शीतला माता मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा उत्सव में जब शिखर पर अमर ध्वजा चढ़ाने की बारी आई, तो यह सम्मान कालूराम वाल्मीकि परिवार को दिया गया। खास बात यह रही कि दक्षिण अफ्रीका में रहने वाले व्यवसायी कुंवर तेज सिंह ने 5 लाख 51 हजार रुपये में बोली जीतने के बाद यह सम्मान वाल्मीकि समाज को समर्पित कर दिया। यह कदम गांव में सामाजिक समानता का प्रतीक बन गया।

वाल्मीकि परिवार की खुशी और कुंवर तेज सिंह की सोच
कालूराम वाल्मीकि ने इस मौके पर भावुक होते हुए कहा, “यह मेरा सौभाग्य है। कुंवर तेज सिंह का धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने पैसा खर्च किया और हमें सम्मान दिया। पूरे वाल्मीकि समाज की ओर से उनका आभार। कुंवर तेज सिंह, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े हैं, ने बताया कि उन्हें इस प्रेरणा का श्रेय संघ को जाता है।

बावरी समाज का योगदान और गांव की सरपंच का बयान
मंदिर के शिखर पर कलश चढ़ाने की जिम्मेदारी महेंद्र कुमार बावरी ने निभाई। उन्होंने 3 लाख 81 हजार रुपये में बोली जीतकर इस कार्य को संपन्न किया। गांव की सरपंच सम्पत कंवर ने इस आयोजन को अविस्मरणीय बताते हुए कहा, “हमारा गांव सामाजिक समरसता की मिसाल बना है। कुंवर तेज सिंह ने पहले भी गांव के लिए मानव और गौ एम्बुलेंस जैसी सेवाएं दी हैं। उनका योगदान अतुलनीय है।”

गांव का सामाजिक परिवेश और चुनौतियां
गांव के निवासी कानाराम प्रजापत ने बताया कि निम्बली एक कृषि प्रधान गांव है, जहां 30 से अधिक जातियों के लोग मिलजुल कर रहते हैं। हालांकि, उन्होंने भीम आर्मी की गतिविधियों और कुछ सामाजिक चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया, जो अनुसूचित जाति के लोगों को अन्य समुदायों से तोड़ने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा, “जब तक हम एक हैं, तभी तक सुरक्षित हैं।”

सामाजिक समरसता का संदेश
इस आयोजन ने दिखा दिया कि जब सभी जातियां और समुदाय एक साथ आते हैं, तो सामाजिक एकता की एक नई मिसाल कायम होती है। कुंवर तेज सिंह जैसे स्वच्छ मानसिकता वाले लोग समाज को नई दिशा देते हैं और हर कुरीति के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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