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Saturday, March 7, 2026

कुंभ तय करेगा अगला प्रधानमंत्री? योगी आदित्यनाथ और RSS की भूमिका पर बड़ी कहानी

महाकुंभ… सनातन धर्म का सबसे बड़ा आयोजन। यही वो मंच है जहाँ धर्म, राजनीति और भविष्य की बड़ी कहानियाँ लिखी जाती हैं। 2013 के कुंभ में संत समाज ने नरेंद्र मोदी के नाम पर मुहर लगाई थी। अब सवाल उठता है- 2025 का कुंभ तय करेगा अगला प्रधानमंत्री? क्या योगी आदित्यनाथ होंगे संघ का अगला चेहरा? या नितिन गडकरी  पर विश्वास जमायेंगे ।इसकी चर्चाएं इसलिए भी सरगर्म हैं कि कुछ ही दिनों पहले गृहमंत्री अमित शाह नासिक में संघ के हेडक्वाटर गए थे और वहां कई घंटों तक कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई थी इसके बाद ही महाराष्ट्र में जहां बीजेपी के आने की न के बराबर संभावना थी वो सत्ता में आ जाती है, वहीं महाराष्ट्र में संघ के चहेते देवेद्रं फडणवीस मुख्यमंत्री बनाए जाते हैं. ऐसा ही हरियाणा के चुनावों में हुआ जहाँ सभी ये मान बैठे थे कि किसी भी सूरत बीजेपी सरकार नहीं बना पाएगी, लेकिन संघ ने कमान अपने हाथों में ली और चुनाव की सूरत ही बदल दी  और नामुमकिन को मुमकिन बना दिया।

राज्यों में जहां बीजेपी की पर्ची सरकार है उनमें कहीं न कहीं संघ की भूमिका भी अहम है. इसलिए पर्ची सरकार के रूप में भी गाए बघाए ये चर्चाओं में आ ही जाता है बीजेपी मतलब पर्ची सरकार– आपको बताते हैं कैसे पीएम मोदी का नाम अचानक पीएम के नाम के लिए पब्लिक में आया और हर कोई उनके नारे लगाने लगा

2013 का महाकुंभ जब पहली बार सामने आया पीएम मोदी का नाम

2013 के कुंभ में, संत समाज और RSS ने एक नई कहानी लिखी। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम संतों के बीच रखा गया। 5 फरवरी 2013 को प्रयागराज की धर्म संसद में ‘नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाओ’ के नारे गूंजे। यही वो पल था जिसने देश की राजनीति बदल दी।

RSS से जुड़े सूत्र बताते हैं कि ये सब योजना के तहत हुआ। संघ प्रमुख मोहन भागवत और अशोक सिंघल ने इसे संत समाज तक पहुँचाया। मोदी का नाम हर मंच पर उभरा और जनता ने इसे देववाणी मान लिया।

क्या संत समाज बनाएगा योगी को PM का चेहरा?

2025 का कुंभ अब एक बार फिर इतिहास लिखने को तैयार है। संघ के सूत्र बताते हैं कि इस बार संत समाज के बीच योगी आदित्यनाथ नितिन गडकरी जैसे नाम चर्चा में है।

योगी आदित्यनाथ, जो आज BJP के स्टार प्रचारक हैं, हर चुनावी राज्य में उनकी गूंज सुनाई देती है। उनके नारे ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ ने महाराष्ट्र और यूपी जैसे राज्यों में चुनावी समीकरण बदल दिए। लेकिन क्या ये नारे और उनकी हिंदू एकता की छवि उन्हें प्रधानमंत्री पद की दौड़ में आगे ले जाएगी?

एक संघ पदाधिकारी बताते हैं, ‘RSS हमेशा जमीन तैयार करता है। योगी आदित्यनाथ का नारा और उनकी छवि संघ के वर्षों के काम का परिणाम है। इसे सिर्फ चुनावी रणनीति समझने की भूल मत कीजिए। 

RSS की रणनीति: क्या कुंभ में योगी आदित्यनाथ को मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी?

आपको बतादें, RSS सिर्फ प्रधानमंत्री ही नहीं, मुख्यमंत्री तय करने में भी बड़ी भूमिका निभाता है। महाराष्ट्र से लेकर हरियाणा, झारखंड, और यूपी तक, संघ का फॉर्मूला स्पष्ट है। सही समय पर सही नेता को आगे लाना। यही वजह है कि 2019 में महाराष्ट्र और 2017 में यूपी के चुनावों में संघ की निर्णायक भूमिका रही।

  • हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर का नाम संघ के समर्थन से उभरा।
  • महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस को संघ की नज़दीकी ने CM बनाया।
  • यूपी में, योगी आदित्यनाथ को हिंदुत्व की धार और संघ के सपोर्ट से आगे लाया गया।

2013 के कुंभ ने नरेंद्र मोदी को दिया था मंच, अब किसकी बारी?

एक कार्यक्रम के दौरान जब एक पत्रकार की ओर से अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र पुरी से आगामी पीएम के फैसले के बारे में पूछा गया था तो उन्होंने कहा कि हर कुंभ में बड़ा फैसला होता है। 2013 में नरेंद्र मोदी पर संतों ने मुहर लगाई थी। अब 2025 में क्या योगी आदित्यनाथ की बारी है? हालांकि परिषद यह भी मानती है कि प्रधानमंत्री रहते किसी दूसरे नाम पर चर्चा उचित नहीं। लेकिन भविष्य की योजना बननी शुरू हो गई है।

उन्होंने कहा कि योगी जी सनातन धर्म के सबसे मजबूत स्तंभ हैं। लेकिन चर्चा अभी अंदर ही अंदर होगी। कोई नारा या घोषणा फिलहाल नहीं होगी।

RSS और राजनीति का गहरा कनेक्शन

RSS का हर कदम रणनीतिक होता है। 2012 में ही अशोक सिंघल ने नरेंद्र मोदी के नाम का संकेत देना शुरू कर दिया था। संघ की यही शैली है। पहले जमीन तैयार की जाती है, फिर नाम उभरता है। इसी तरह, योगी आदित्यनाथ के लिए भी माहौल बनाया जा रहा है।

सवाल ये है कि क्या कुंभ 2025, योगी आदित्यनाथ को प्रधानमंत्री पद का नया चेहरा बनाएगा? या फिर बीजेपी के भीतर कोई और नाम उभरेगा? जवाब तो कुंभ के बाद ही मिलेगा। लेकिन संघ का हर कदम भविष्य को ध्यान में रखकर उठाया गया है।

महाकुंभ का मंच सिर्फ धर्म का नहीं, राजनीति का भी है। यही मंच इतिहास बदलता है। 2013 में मोदी का नाम आया, 2025 में क्या योगी का नाम तय होगा? संघ की योजना, संतों का समर्थन और जनता की उम्मीदें—सबकुछ यहाँ तय होगा। कुंभ 2025 के बाद क्या भारत का अगला सूरज योगी आदित्यनाथ होंगे? महाकुंभ तय करेगा देश का अगला प्रधानमंत्री!

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