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Saturday, March 7, 2026

आईएसओसी जेनेवा द्वारा आयोजित प्री-आईडीसी समिट में डॉ. डीपी शर्मा की-नॉट स्पीच

इंटरनेट की सार्वभौमिकता और उसके मानवाधिकार के रूप में उपयोगिता पर चर्चा करते हुए, आईएसओसी जेनेवा द्वारा आयोजित प्री-आईडीसी समिट में भारत के अंतरराष्ट्रीय डिजिटल डिप्लोमेट और कंप्यूटर वैज्ञानिक डॉ. डीपी शर्मा ने एक महत्वपूर्ण की-नॉट स्पीच दी। इस समिट का आयोजन एलिली इंटरनेशनल होटल, अदिस अबाबा, इथियोपिया में किया गया

यूनेस्को द्वारा निर्मित रोमैक्स फ्रेमवर्क (ROAM-X Framework) का उद्देश्य इंटरनेट के समावेशी और अधिकार-आधारित उपयोग को बढ़ावा देना है। पहले इस फ्रेमवर्क में 109 इंडिकेटर्स थे, जिन्हें अब बढ़ाकर 300 इंडिकेटर्स कर दिया गया है। यह फ्रेमवर्क इंटरनेट की सार्वभौमिकता के सिद्धांतों जैसे अधिकार, खुलापन, पहुँच, और बहुहितधारक भागीदारी पर आधारित है। “एक्स” का अर्थ क्रॉस-कटिंग मुद्दों से है, जिसमें लैंगिक समानता, सतत विकास, विश्वास और सुरक्षा शामिल हैं।

समिट का उद्घाटन इथियोपियाई केंद्रीय सरकार के मंत्री डॉ. येशुरुन अलेमायेहु और आईएसओसी अफ्रीका के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. डाविट बेकेले ने किया। समिट के पहले सत्र में डॉ. असरत मुलातु ने अध्यक्षता की और डॉ. डीपी शर्मा ने यूनेस्को के रोमैक्स फ्रेमवर्क और इंटरनेट को मानवाधिकार के रूप में स्वीकार करने के महत्व पर अपनी की-नॉट स्पीच दी। इस सत्र में डॉ. बीकाल गिज़ाचेव मॉडरेटर और फ़ारिस मुबारक (ECySA) ने इंटरनेट सुरक्षा, मानक, साइबर खतरे और मानवाधिकार जैसे विभिन्न विषयों पर पैनल चर्चा की।

डॉ. शर्मा का बयान
डॉ. शर्मा ने अपनी स्पीच में कहा, “दुनिया के सभी देशों, खासकर विकासशील और अविकसित एशियाई और अफ्रीकी देशों को यह मूल्यांकन करना चाहिए कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, गोपनीयता और सूचना तक पहुंच जैसे मानवाधिकारों का ऑनलाइन सम्मान और संरक्षण किस हद तक हो रहा है।” उन्होंने बताया कि सभी देशों को नवाचार और सहयोग के लिए एक खुला वातावरण सुनिश्चित करते हुए इंटरनेट के खुलापन का आकलन करना चाहिए। इसके साथ ही वंचित और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के लिए इंटरनेट की उपलब्धता और सामर्थ्य को भी देखना आवश्यक है, जिसमें भाषाई, सांस्कृतिक और विकलांगता समावेशन पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा, “इंटरनेट प्रशासन में बहुहितधारक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए, सरकारें, निजी क्षेत्र, नागरिक समाज, शिक्षाविद और तकनीकी समुदाय की भूमिका को जांचने की आवश्यकता है।” लैंगिक समानता और सामाजिक समावेशन जैसे विषयों को इंटरनेट नीतियों में कितना अच्छी तरह एकीकृत किया गया है, इस पर भी जोर दिया।

सतत विकास और इंटरनेट नीतियां
डॉ. शर्मा ने यह भी कहा कि सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के साथ इंटरनेट नीतियों का संरेखण करना महत्वपूर्ण है। इसके लिए यूनीसेफ द्वारा निर्धारित रोमैक्स फ्रेमवर्क की नीतिगत सिफारिशें बेहद अहम हैं।

भारत का असंवेदनशीलता
डॉ. शर्मा ने अफसोस जताया कि भारत ने अभी तक यूनेस्को के रोमैक्स फ्रेमवर्क के आधार पर इंटरनेट की पहुंच का मूल्यांकन नहीं कराया है, जो यह संकेत करता है कि क्या भारत के लिए इंटरनेट को जन-जन तक पहुंचाने का अंतर्राष्ट्रीय मिशन अभी भी कोई अहम मुद्दा नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जबकि भारत 2020 से इंडिया इंटरनेट गवर्नेंस फोरम का आयोजन करता आ रहा है, फिर भी इस प्रकार के मूल्यांकन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

आने वाले समिट के निर्णय
डॉ. शर्मा ने कहा कि जनवरी 2025 में होने वाले फाइनल अंतर्राष्ट्रीय समिट में यह निर्णय लिया जाएगा कि यूनेस्को के रोमैक्स फ्रेमवर्क के आधार पर सभी देशों को इंटरनेट की पहुंच कैसे सुनिश्चित करनी है, जिससे डिजिटल डिवाइड को खत्म किया जा सके और इंटरनेट का उपयोग मानवाधिकार के रूप में बढ़ावा दिया जा सके।

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